मुरादाबाद। पंचायत चुनाव में इस दफा के परिणाम कई मामलों में अलग रहे। सत्ताधारी भाजपा को जहां लंबे समय से खामोश विपक्ष से बड़ा झटका मिला है। वहीं अन्य दलों के लिए भी कई सबक हैं। उम्मीदवार की घोषणा के समय कई अपनों को झटकने वाली पार्टियों को बागी बने अपनों ने भी झटका दिया है। अपने दलों में समर्थन न मिलने से दलबदल की राह पर चले कई उम्मीदवार चुनावी नतीजों की मेरिट लिस्ट में खुद जगह भले नहीं बना सके लेकिन अपने मूल दल को भी कामयाब नहीं होने दिया। मुरादाबाद जिला पंचायत क्षेत्र में दलबदल करने वाले कई उदाहरणों ने सपा को मजबूती दी है।
बसपा के सेक्टर प्रभारी जितेंद्र वार्ड 17 से बसपा से समर्थन की चाहत रखते थे। पार्टी से टिकट नहीं मिला तो उन्होंने बागी रुख के साथ खुद नामांकन करा दिया। इस वार्ड से भाजपा प्रत्याशी का नामांकन पत्र खारिज हो गया तो जितेंद्र ने भाजपा से मेलजोल बढ़ाया। चूंकि पार्टी प्रत्याशी का पर्चा खारिज होने से भाजपा के लिए इस वार्ड में कोई विकल्प नहीं बचा था, लिहाजा उन्होंने बसपा से बगावत कर पर्चा भरने वाले जितेंद्र प्रधान को अपनी पार्टी का समर्थित प्रत्याशी बनाया लेकिन सत्ताधारी पार्टी का सहयोग भी उन्हें जीत नहीं दिला सका। इस वार्ड से सपा की शशिबाला ने जीत हासिल की। मुरादाबाद ब्लॉक के वार्ड 14 से बसपा के पूर्व जिला प्रभारी रह चुके विजय सिंह ने भी टिकट न मिलने पर बसपा प्रत्याशी के खिलाफ बगावत करके चुनाव मैदान में ताल ठोक दी। चुनाव लड़ा लेकिन जीत नहीं सके। यहां से सपा ने सीट निकाली।
- बसपा कार्यकर्ता महीपाल ने बसपा से टिकट न मिलने पर भाजपा का दामन थामा। भाजपा ने दरियादिली
दिखाई, जातिगत समीकरण देख उन्हें वार्ड 22 से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ाया लेकिन सत्तापक्ष का समर्थन भी उन्हें हार से नहीं बचा सका। यहां मोहम्मद नवेद जीते।
- पूर्व प्रधान विक्रम प्रधान बसपा से जुड़े थे, लेकिन बसपा से अपेक्षित सहयोग न मिलने पर वार्ड 18 से निर्दलीय चुनाव लड़े लेकिन हार गए। इस सीट पर बसपा के रबुल पाशा ने जीत हासिल की है।
- वार्ड पांच से पूर्व ब्लॉक प्रमुख मुजाहिद अली सपा से ब्लॉक प्रमुख रह चुके हैं। लेकिन पंचायत चुनाव से कुछ समय पहले उन्होंने बसपा का दामन थाम लिया।
- बसपा ने मुजाहिद की पत्नी नसरीन को वार्ड पांच से प्रत्याशी बनाया और उन्होंने जीत भी हासिल की। उनकी भाभी आशिया को भी वार्ड छह से टिकट दिया लेकिन वह बहुत कम मतों के अंदर से हार गईं।
- वार्ड 16 से भाजपा समर्थित रंजीत चुनाव जीते, लेकिन वह पहले बसपा में थे। बसपा के कुछ नेता उन्हें टिकट भी दिलाना चाहते थे लेकिन बात नही बनी तो उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा ने उन्हें टिकट दिया और उन्होंने चुनाव जीत लियाए हालांकि इस सीट को गंवाने का मलाल बसपा नेताओं को भी है।
चुनाव परिणाम की समीक्षा करेंगे
मुरादाबाद। चुनाव परिणाम आने के बाद भाजपा जिलाध्यक्ष राजपाल सिंह चौहान, बसपा मंडल सेक्टर प्रभारी रणविजय सिंह और सपा जिलाध्यक्ष जयवीर सिंह यादव टिकट न मिलने से दल बदल की राह पर बढ़े पुराने साथियों से हुए सियासी नुकसान को अंदर खाने स्वीकार रहे हैं। उनका कहना है कि चुनाव परिणाम की पार्टी स्तर पर समीक्षा की जाएगी। उसमें इन बिंदुओं पर बात होगी।