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Moradabad News: प्राचार्य के निलंबन के विरोध में उतरी परिषद, बोले... अवैध है कार्रवाई

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मुरादाबाद। केजीके प्राचार्य के निलंबन का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। इस मामले में प्राचार्य परिषद ने सोमवार को कुलपति को प्रार्थना पत्र देकर प्रबंधक के फैसले का विरोध किया। इसके अलावा प्रबंधक ने प्राचार्य के खिलाफ तीन सदस्यीय जांच समिति बनाई है। वहीं, कॉलेज में प्रो. विनोद पांडेय ने कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में तीन समितियों के प्रभारी बदले।
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प्राचार्य परिषद गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत और महामंत्री प्रो. वीर वीरेंद्र सिंह द्वारा हिंदू कॉलेज में बैठक आयोजित की गई। इसमें केजीके कॉलेज के प्रबंधक द्वारा प्राचार्य प्रो. सुनील चौधरी के निलंबन पर चर्चा करते हुए इसे अवैधानिक बताया। पदाधिकारियों ने कहा कि कॉलेज की कालातीत प्रबंध समिति ने दो मई को अवैधानिक रूप से प्राचार्य को निलंबित करने का आदेश जारी किया है। यह आदेश कुलपति के अनुमोदन के बिना जारी किया गया है। अनुमोदन के अभाव में यह विधिसम्मत रूप से प्रभावी नहीं माना जा सकता है। वर्ष 2003 के बाद से आज तक प्रबंध समिति का चुनाव एवं अनुमोदन विश्वविद्यालय से नहीं हुआ है। प्रबंध समिति में विश्वविद्यालय के नियम 11.05 का खुल्ला उल्लंघन किया जा रहा है। इसमें सगे पिता और पुत्र महाविद्यालय की प्रबंध समिति के अध्यक्ष और सचिव हैं। जबकि नियमानुसार सगे रक्त संबंधी प्रबंध समिति के सदस्य नहीं हो सकते।
कालातीत प्रबंध समिति द्वारा निलंबन के संबंध में ना तो कोई बैठक की गई और ना ही कोई एजेंडा और ना ही कोई सर्वसम्मत प्रस्ताव दिया गया। इसके अभाव में आदेश पूर्ण रूप से अवध है। बैठक में यह भी चर्चा हुई कि निलंबन आदेश में लगाए गए आरोप सामान्य, अस्पष्ट और साक्ष्य विहीन हैं जिन पर कोई निष्पक्ष प्रारंभिक जांच नहीं की गई है।
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निलंबन आदेश में ना तो सक्षम प्राधिकारी की पूर्व स्वीकृति प्राप्त की गई है और ना ही निर्धारित वैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। बैठक सर्वसम्मति से प्रबंधक के इस अवैधानिक निर्णय की निंदा की गई और प्रस्ताव पारित कर प्रकरण पर कठोर कार्रवाई के लिए कुलपति गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय को प्रार्थना पत्र दिया।

प्राचार्य को एक सप्ताह में देना है जवाब
प्रबंधक विवेक खन्ना ने बताया कि सोमवार को वेतन बिल हस्ताक्षर कराकर क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के यहां भेज दिए गए हैं। निलंबित प्रो. सुनील चौधरी ने प्राचार्य पद का दायित्व प्रो. विनोद कुमार पांडेय को नहीं सौंपा है। फिर भी कॉलेज को सुचारू चलाने के लिए प्राे विनोद पांडेय अपने दायित्व निभा रहे हैं। वेतन बिल पर हस्ताक्षर करवाने के अलावा उन्होंने नीट परीक्षा भी शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न करवाई है। प्रो. सुनील चौधरी के खिलाफ एक तीन सदस्यीय समिति बना दी है। निलंबन के समय प्रो. सुनील चौधरी को सौंपी चार्जशीट का जवाब एक सप्ताह में देना है। समिति इस जवाब का परीक्षण कर अपनी रिपोर्ट सौंपेगी।

तीन समितियों में किया फेरदबदल
कार्यवाहक प्राचार्य के रूप में प्रो. विनोद कुमार पांडेय ने मुख्य नियंता के पद से प्रो. गुरमीत सिंह को हटाकर प्रो. जगदंबे यादव को दायित्व सौंपा है। परीक्षा प्रभारी प्रो. एके सिंह की जगह प्रो. ममता रानी और छात्र कल्याण अधिकारी डॉ. अनिल चौहान की जगह प्रो. सुकृति त्यागी को बनाया है। उन्होंने कहा कि चूंकि प्राे. सुनील चौधरी ने मुझे प्राचार्य पद का चार्ज नहीं दिया, इसलिए मैं प्राचार्य कक्ष में नहीं गया हूं। प्रबंधन के आदेश के अनुरूप प्राचार्य पद के दायित्वों का निर्वहन कर रहा हूं। वेतन बिल क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी के पास पहुंच गए हैं।

वर्जन...
वेतन बिल मिल गए हैं। चूंकि कई बिंदुओं पर परीक्षण किया जाएगा। इसके बाद जो नियमत: सही होगा, उसी के हिसाब से फैसला लिया जाएगा। इसलिए अभी वेतन जारी होने में समय लग सकता है।
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प्रो. डॉ. सुधीर कुमार सिंह, क्षेत्रीय उच्च शिक्षा अधिकारी
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