मुरादाबाद। मानसून करीब है। हर मानसून में जर्जर भवनों से दुर्घटनाओं की खबर सामने आती रहती हैं। इससे कई बार जनहानि भी होती है। लेकिन, इन भवनों को जर्जर घोषित करने के बाद नगर निगम आगे की कोई कार्रवाई नहीं कर पाता है।
निगम सिर्फ नोटिस देकर इन भवन स्वामियों को सचेत कर देता है कि उनका भवन जर्जर हो चुका है। इसे खुद ही गिरा लें, वरना किसी भी तरह की दुर्घटना पर यह जिम्मेदारी स्वयं भवन स्वामी की ही होगी। नगर निगम ने अब तक कुल 92 भवनों को जर्जर घोषित किया है, लेकिन इन सभी भवनों पर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ नोटिस ही चस्पा कर दिया गया है।
निगम के मानकों के अनुसार एक मकान या भवन निर्माण की आयु 40 से 50 साल तक होती है। उसके बाद उसकी हालत रहने लायक नहीं रहती है। ऐसे में भवनों का सर्वे कर उसे जर्जर घोषित किया जाता है। निगम के निर्माण विभाग के अभियंता ऐसे कमजोर भवनों को चिह्नित करते हैं। अगर भवन कमजोर मिलता है तो उसे जर्जर घोषित कर स्वामी को भवन जर्जर होने का नोटिस दिया जाता है।
नोटिस में बताया जाता है कि भवन की हालत जर्जर है और उसे कंडम घोषित किया जाता है। इसलिए इसे स्वत: ही ध्वस्त करा दें। हर वर्ष बरसात से पहले इस तरह का नोटिस भवन स्वामियों को दिया जाता है। लेकिन निगम के पास इसका कोई भी रिकॉर्ड मौजूद नहीं होता कि भवन स्वामियों ने वह भवन ध्वस्त किए या नहीं। न ही इस मामले में आगे कोई कार्रवाई होती है।
- भवन के जर्जर होने की शर्त
- भवन निर्माण हुए 50 वर्ष से अधिक होने पर
- अभियंताओं की जांच में कमजोर पाए जाने पर
- भवन का कोई हिस्सा गिरता है तो जांच के बाद जर्जर पाया गया हो
- भवनों की जांच पूरी करने के बाद उसे जर्जर घोषित किया जाता है। इसके बाद भवन स्वामी को सूचना के तौर पर नोटिस दिया जाता है। अबतक 92 भवनों को चिह्नित कर उन्हें नोटिस भेजा गया है। - दिनेश सचान, मुख्य अभियंता, नगर निगम