मुरादाबाद। 1952 से 1967 तक देश में लोकसभा और विधानसभा के चुनाव एक साथ कराए जाते थे। जिससे सरकारें स्थिर रहती थीं और विकास कार्य बिना किसी रुकावट के चलते थे। 1971 में कांग्रेस द्वारा इस व्यवस्था को तोड़ने के बाद देश में बार-बार चुनाव होने लगे, जिससे विकास की गति बाधित हुई है। यह बात भाजपा की ओर से आयोजित एक राष्ट्र, एक चुनाव विषयक प्रबुद्ध समागम में राज्य मंत्री डॉ. सोमेंद्र तोमर ने कहा। रामगंगा विहार मंडल स्थित आरएसडी एकेडमी में आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बार-बार चुनाव होने से न केवल आर्थिक संसाधनों की बर्बादी होती है, बल्कि सरकारी अमला, शिक्षक और सुरक्षाकर्मी भी बार-बार चुनावी कार्य में व्यस्त हो जाते हैं। जिससे शिक्षा और सुरक्षा व्यवस्था पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।कार्यक्रम को संबोधित करते हुए डॉ. केके मिश्रा ने कहा कि एक राष्ट्र, एक चुनाव भारत की लोकतांत्रिक प्रणाली को सशक्त और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है। समागम में कुंदरकी विधायक रामवीर सिंह, भाजपा महानगर अध्यक्ष गिरीश भंडूला, निमित जायसवाल, महानगर राजीव गुप्ता मौजूद रहे। ब्यूरो