एसएसपी ने बताया कि गिरफ्तार सिपाही गिरोह के लिए कैरियर के रूप में काम करता था, जिससे चेकिंग के दौरान बचा जा सके। वहीं गिरफ्तार आरोपियों में रामपुर निवासी मोहम्मद रियाज दिव्यांग है। पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि वह कम रेट में नई करंसी से पुराने नोट बदल लेते हैं। इस काम में फैसल का भी बराबर का हिस्सा रहता है। गिरफ्तार आरोपी नोटों को नई करंसी से बदलने के लिए नूरपुर जा रहे थे। एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि छह आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर गिरफ्तार तीनों आरोपियों को जेल भेज दिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। कार भी पुलिस के कब्जे में है।
10 प्रतिशत पर बदले जाते थे पुराने नोट
एसपी क्राइम सुभाष चंद्र गंगवार ने बताया कि गिरोह के सभी सदस्यों के काम बंटे हुए थे। संभल के सैदनगली कस्बे का रहने वाला फैसल पुराने नोटों को इकट्ठा कर रामपुर निवासी रियाज और यासीन के पास पहुंचाता था। यहां से नोट सत्तार तक पहुंचाए जाते थे। बरामद नोट रामपुर के टांडा से नूरपुर भेजे जा रहे थे। आरोपी सत्तार बिजनौर जिले में गुहावर और नूरपुर के बीच पड़ने वाले मुर्गी फॉर्म पर रहता है। यूसुफ उसी का सहयोगी है। दोनों पुराने नोटों के बदले 10 प्रतिशत नए नोट देते थे। डेढ़ करोड़ के बदले 15 लाख रुपये गिरोह को देने थे। गिरफ्तार और भागे हुए लोगों के अलावा तीन और नाम सामने आए हैं। जल्द ही उनके नाम भी मुकदमे में शामिल किए जाएंगे।
बैंक अधिकारियों की मदद से खपाते थे नोट
पुलिस की पूछताछ के दौरान आरोपियों ने बताया कि उनके बैंक अधिकारियों से गहरे रिश्ते हैं। बैंक अधिकारी कमीशन लेकर पुराने की जगह नए नोट देते हैं। एसपी क्राइम ने बताया कि इस मामले में संबंधित बैंक अधिकारियों से पूछताछ कर सत्यापन किया जाएगा। यह गिरोह काफी समय से काम कर रहा है, लेकिन पहली बार पुलिस की पकड़ में आया है।