मुरादाबाद। सालों से टीईटी परीक्षा पास करने का प्रयास कर रहे थे, लेकिन पेपर हार्ड होने की वजह से पास नहीं हुए। इस बार पेपर काफी सरल आया। आधे घंटे में काफी सवाल हल भी कर दिए ,लगा कि इस बार पास हो जाएंगे, लेकिन पेपर स्थगित कर दिया गया। नतीजतन युवाओं का सरकारी शिक्षक बनने का सपना पलभर में ही टूट गया। इनमें कई शिक्षा मित्र और डीएलएड पास शिक्षक भी शामिल हैं। अमर उजाला ने परीक्षार्थियों से बातचीत कर उनकी समस्याओं को जानी।
सारी मेहनत धरी रह गई
बिजनौर जिले के धामपुर निवासी आशी गुप्ता ने कहा कि मेरा गांव मुरादाबाद से करीब 70 किमी है। परीक्षा के लिए समय पर पहुंचने के लिए पापा ने लिए दो हजार रुपये में किराए की गाड़ी की थी। सुबह छह बजे ही पेपर के लिए घर से निकल गए थे। पेपर भी काफी आसान था। पास होने की पूरी उम्मीद थी, लेकिन पेपर टलने से सारी मेहनत धरी रह गई।
पेपर आउट करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए
करुला निवासी रोजी ने बताया कि उसने सुना था कि टीईटी का पेपर काफी हार्ड होता है, लेकिन आज पेपर काफी आसान था। उसने कई सवालों के जवाब भी दे दिए थे। सुबह 10.30 बजे जब परीक्षा कक्ष में पेपर वापस ले लिया गया तो वह तो वे हक्की बक्की रह गई। इससे साफ है कि सरकारी व्यवस्थाओं में खामियां थी। पेपर आउट करने वालों को सख्त सजा मिलनी चाहिए।
...उसे तो यकीन ही नहीं हुआ
मुरादाबाद निवासी निधि का कहना था कि सब कहते थे कि पेपर काफी कठिन आता है। इसलिए वह काफी नर्वस थी, लेकिन पेपर देखा तो वह आसान था, लगा कि वह आसानी से पास कर लेगी, लेकिन तभी पेपर टालने की सूचना मिली तो उसे यकीन नहीं हुआ। उसकी उम्मीद पल भर में धूमिल हो गई।
....मेरी तो उम्मीद ही टूट गई
हिमगिरी कॉलोनी निवासी संजना प्रियदर्शी ने बताया कि कई साल में इस बार पेपर काफी आसान आया। उसने आधा घंटे में काफी पेपर हल भी कर लिया था। लग रहा था कि कई साल का प्रयास इस साल सफल हो जाएगा, लेकिन पेपर टल गया और उसकी उम्मीद ही टूट गई।
पहली बार पेपर दिया वह भी स्थगित हुआ
जसपुर से आई रीशू चौहान ने डीएलएड किया है। पहली बार टीईटी का पेपर देने आई थी, लेकिन पेपर स्थगित हो गया। वह काफी मायूस थी।
पति और सास ने संभाले बच्चे
प्रेमनगर निवासी रीना ने रात एक बजे तक पेपर की तैयारी की। सुबह छह बजे उठकर एक घंटा पढ़ाई की और आठ बजे परीक्षा के लिए निकल गई। पति परीक्षा केंद्र पर छोड़कर घर चले गए और उनकी सास और पति ने दो बच्चों को संभाला, लेकिन आधे घंटे बाद ही पेपर स्थगित हो गया तो बहुत मायूस हो गई क्योंकि पेपर काफी आसान आया था और पास होने की काफी उम्मीद थी।
दो मासूम बेटियों को छोड़कर पेपर देने पहुंची संतोष
अमरोहा जिले के मंडी धनौरा निवासी संतोष 50 किमी दूर पेपर देने आई थी। घर पर दो छोटी बेटियां हैं। वह सुबह छह बजे घर से चली थी, उस वक्त उसकी दो छोटी बेटियां सो रही थी। उनकी सास उनकी देखभाल करेंगीं। परीक्षा कक्ष में पेपर देखकर वह काफी खुश थी। क्योंकि इस बार पेपर काफी आसान था। कई सवाल कर भी लिए थे, लेकिन पेपर स्थगित होने से सारी उम्मीद धरी रह गई।
60 किमी दूर से पेपर देने पहुंची रानी
काशीपुर से करीब 60 किमी दूर परीक्षा देने आई शिक्षा मित्र रानी ने बताया कि वह यूपीटीईटी परीक्षा पास कर चुकी है। केवल सुपरटेक की तैैयारी के लिए पेपर देने आई थी, लेकिन पेपर निरस्त होने से काफी मायूस है। पांच महीने से लगातार तैयारी कर रही थी। इसी तरह बिजनौर के स्योहारा से पेपर देने आई प्रिया भी पेपर निरस्त होने से काफी मायूस थी।
भगतपुर निवासी सर्वेद्र शर्मा शिक्षा मित्र हैं। वर्ष 2006 से पढ़ा रहे हैं। कई साल से टीईटी परीक्षा दे रहे हैं, लेकिन आज तक क्लीयर नहीं हुआ। आज पहली बार पेपर देखकर लगा कि सपना पूरा हो जाएगा। उन्होंने आधे घंटे मे दो भाग कर भी लिए थे, लेकिन पेपर स्थगित हो गया। आज जितनी मायूसी कभी नहीं हुई। सरकार को पेपर लीक होने से रोकने को कडे कानून बनाने चाहिए।