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Moradabad News: समर्थ पोर्टल के जटिल सवालों का जवाब देने में शिक्षक असमर्थ

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मुरादाबाद। केजीके डिग्री कॉलेज के एक विभाग में शिक्षक के पद का सृजन 1960 में हुआ। अब समर्थ पोर्टल पर जानकारी मांगी जा रही है कि किस शासनादेश के तहत यह पद सृजित किया गया। यह रिकॉर्ड अब कॉलेज के पास नहीं है। इसी तरह प्रोफेसरों से 2008 से पहले की पीएचडी में भी आईएसएसएन नंबर मांगे जा रहे हैं, जबकि उस समय ऐसे नंबर नहीं होते थे। ऐसे में तमाम प्रोफेसर और शिक्षक समर्थ पोर्टल के सवालों का जवाब देने में असमर्थ हो गए हैं।
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उच्च शिक्षा विभाग में अब हर कार्य समर्थ पोर्टल के तहत हो रहा है। इसमें दाखिले से लेकर शिक्षकों, विद्यार्थियों व कॉलेजों में चलने वाले पाठ्यक्रमों की जानकारी तक सब शामिल है। इससे पहले मानव संपदा जैसे पोर्टलों पर शिक्षक यह सारी जानकारियां दे चुके हैं। समर्थ पोर्टल पर और डिटेल में चीजें पूछी जा रही हैं, तमाम दस्तावेज शिक्षकों के पास अब उपलब्ध नहीं हैं।
हिंदू कॉलेज के रक्षा अध्ययन विभाग के अध्यक्ष डॉ. आनंद सिंह बताते हैं कि समर्थ पोर्टल पर पारिवारिक जानकारियां भी मांगी जा रही हैं। परिवार में कितने बेटे-बेटी हैं, कितने शादीशुदा हैं। पत्नी क्या करती हैं। ऐसे सवालों का जवाब देने में शिक्षक असहज महसूस कर रहे हैं। साथ ही उन्हें भय है कि यह पोर्टल साइबर सुरक्षा के लिहाज से कितना सुरक्षित है। जानकारी न भरने पर शिक्षकों के सामने वेतन रुकने का भी संकट है। मंडल के सभी सरकारी व एडेड डिग्री कॉलेजों के शिक्षक इस समस्या से जूझ रहे हैं।
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एक माह परेशान होने के बाद कराई गई वर्कशॉप
डिग्री कॉलेजों के शिक्षक एक माह से अधिक समय तक इस समस्या से जूझते रहे। इसके बाद निदेशालय की ओर से विश्वविद्यालय स्तर पर लिंक जारी कर ऑनलाइन वर्कशॉप कराई गई। इसमें शिक्षकों को जानकारी दी गई है कि प्रश्नों का जवाब किस तरह भरना है, किन प्रश्नों का जवाब देना जरूरी नहीं है। अब एक जून से पोर्टल दोबारा खोला जाएगा। 50 प्रतिशत शिक्षक अभी जानकारी भरने से रह गए हैं। 15 जून तक इन्हें जानकारी देनी होगी। वर्कशॉप के बाद भी शिक्षकों के मन में कई सवाल हैं।

क्या कहते हैं शिक्षक (फोटो)
समर्थ पोर्टल पर मांगी गई जानकारियों को भरने में कई शिक्षकों को परेशानी आई। अब एक प्रभारी कॉलेज स्तर पर एक विश्वविद्यालय स्तर पर बनाए गए हैं। शिक्षक इनसे पूछकर जानकारियां भरेंगे। अब भी कई शिक्षकों के सामने समस्याएं आ सकती हैं।
- प्रो. सत्यव्रत सिंह रावत, प्राचार्य, हिंदू कॉलेज

समर्थ से पहले मानव संपदा व अन्य पोर्टल पर शिक्षकों ने सभी जानकारियां भरी थीं। वहीं से डाटा उठाना चाहिए। पीएचडी की तीन साल की प्रक्रिया में कई चरण होते हैं। हर चरण की गहन जानकारी मांगी जा रही है। शिक्षकों से एग्जामिनेशन ड्यूटी का प्रमाणपत्र तक पोर्टल पर मांगा गया है।
- प्रो. चारू मेहरोत्रा, प्राचार्य, गोकुलदास कॉलेज

1950-60 के दशक में सृजित पदों के लेकर जानकारी मांगी गई है कि किस आदेश के तहत यह पद बनाए गए। जबकि वर्तमान में इन पदों पर तीन शिक्षक सेवानिवृत्त हो चुके हैं। सेमिनार से जुड़ी जानकारियों में भी दिक्कत आई थी। - शिव पूजन यादव, प्रभारी समर्थ पोर्टल, केजीके कॉलेज


समर्थ पोर्टल से जुड़ी समस्याओं को हल करने के लिए निदेशालय वर्कशॉप करा चुका है। अब एक जून से फिर पोर्टल खुलेगा। उम्मीद है इस बार कोई परेशानी नहीं आएगी। यदि परेशानी आई तो उसका हल निकाला जाएगा। इसके लिए विवि में प्रभारी बनाए गए हैं।
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- प्रो. सचिन माहेश्वरी, कुलपति, गुरु जंभेश्वर विवि
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