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Moradabad News: टैरिफ का समाधान मिला न नए ऑर्डर, स्टोर भी डूबे

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मुरादाबाद। नौ जुलाई बीतने के बाद भी निर्यातकों को टैरिफ के मुद्दे का समाधान नहीं मिला है। अमेरिकी ग्राहकों के मन में बड़ी असमंजस की स्थिति है और नए ऑर्डर नहीं दे रहे हैं। दूसरी ओर अमेरिका के कई बड़े ग्राहकों के स्टोर दिवालिया हो गए हैं। ग्राहकों ने 200 दिन तक की उधारी रखी है। मुरादाबाद का कारोबार प्रभावित है और नए ऑर्डर न मिलने से निर्यातकों में चिंता गहराने लगी है।
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यूएसए के स्टोर दिवालिया होने से करीब 60 करोड़ के नुकसान का अनुमान लगाया जा रहा है। एट होम नाम के बाइंग स्टोर के दिवालिया घोषित होने के बाद एक्शन स्टोर ने भी खरीदारी कम ली है। मुरादाबाद के अधिकांश निर्यातक क्रिसमस के 60 प्रतिशत ऑर्डर अमेरिका के लिए रवाना कर चुके हैं। शेष माल प्रतिशत माल अक्तूबर तक धीरे-धीरे पहुंचेंगा। मुरादाबाद हैंडीक्राफ्ट एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के मुताबिक पुराने ऑर्डर की शिपमेंट एचसी कोड के जरिए की जा रही है। इस कोड पर टैरिफ की पुरानी दरें निर्धारित हैं। टैरिफ से संबंधित नई घोषणा 10 अगस्त तक हो सकती है। इस बीच नए ऑर्डर मिलने की उम्मीद न के बराबर है।
हस्तशिल्प निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएच), यंग एंटरप्रेन्योर्स सोसायटी (यस) के प्रतिनिधियों का कहना है कि अमेरिकी ग्राहकों से पिछले 15-20 दिन में नए ऑर्डर नहीं मिले हैं। आने वाले 30 दिन में भी ऑर्डर मिलना मुश्किल है। अमेरिका के कई स्टोर्स के दिवालिया होने के बाद अब टीजेएक्स, बेलिंडा और रॉक्स जैसे स्टोर्स से ही उम्मीद है।
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यूरोप और मध्य पूर्व के देशों से भी धीमा हुआ व्यापार
- निर्यात संगठनों का कहना है कि यूरोप की अर्थव्यवस्था भी वर्तमान समय में नीचे जा रही है। वहां के स्टोर्स रिवाइरा मैसन और विलियम ई-कॉनर दिवालिया हो चुके हैं। कुछ स्टोर्स से नए ऑर्डर मिले हैं लेकिन संख्या कम है। युद्ध के बाद मध्य पूर्व के देशों के भी यही स्थिति है। इस्राइल-ईरान युद्ध के बाद इक्का-दुक्का ऑर्डर ही मिले हैं। ऐसे में आने वाला समय जटिल हो सकता है। दक्षिण अफ्रीका, तुर्किये, ऑस्ट्रेलिया व चीन से व्यापार बढ़ाने की दिशा में प्रयास चल रहे हैं।

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लगातार बढ़ रही हैं कच्चे माल की कीमतें
- मुरादाबाद में पीतल के अलावा कांसा, एल्युमिनियम, स्टील व अन्य धातुओं से भी उत्पाद तैयार होते हैं। सभी धातुओं के कच्चे माल की कीमत लगातार बढ़ रही है। इस पर सरकार का भी अंकुश नहीं है। एल्युमिनियम के उत्पाद निर्यात करने वाली फर्मों का कहना है कि चार माह पहले तक कच्चे माल की कीमत 200 रुपये प्रति किलो थी। अब यह 250 तक पहुंच गई है। इसी तरह पीतल व अन्य धातुओं की सिल्ली के दाम भी बढ़े हैं।

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निर्यातकों के वर्जन
अमेरिका के खरीदार दिवालिया हो रहे हैं। यूरोप से ऑर्डर मिलने कम हो गए हैं। स्थिति खराब है और आने वाला समय चिंताजनक है। टैरिफ रुकने के बाद बीच में काम जरूर मिला था लेकिन अब नहीं है। ग्राहक भुगतान भी देरी से कर रहे हैं।
- दीपक चौधरी, निर्यातक
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- 10 अगस्त तक टैरिफ की स्थिति स्पष्ट हो सकती है। इस दौरान अमेरिका ग्राहक जल्दबाजी नहीं कर रहे हैं। कुछ स्टोर्स के दिवालिया होने का गहरा असर है। 15 अगस्त के आसपास ही अमेरिका से नए ऑर्डर मिलेंगे। टैैरिफ बढ़ा तो मुश्किलें और बढ़ जाएंगी।
- हेमंत जुनेजा, निर्यातक
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वर्तमान में सिर्फ पुराने ऑर्डर के शिपमेंट ही अमेरिका रवाना हो रहे हैं। हमारे पास नए ऑर्डर नहीं हैं। मध्य पूर्व के देशों से भी व्यापार कम हुआ है। निर्यातकों के साथ सीधे जुड़े हजारों कारीगरों के लिए भी संकट की स्थिति है।
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- नजमुल इस्लाम, संरक्षक एमएचईए
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