बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने स्वामी प्रसाद मौर्य के पार्टी छोड़कर जाने की बाबत शनिवार को मुरादाबाद में कहा कि उनके जाने से घर का कचरा साफ हो गया है। खुद से वेस्ट यूपी और उत्तराखंड का कामकाज छिनने की चर्चाओं पर नसीमुद्दीन सिद्दीकी पहले मुस्कुराए फिर बोले, झूठी बातें हैं।
मुरादाबाद मंडल की समीक्षा करने के लिए शनिवार को मुरादाबाद पहुंचे बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने खुद से वेस्ट यूपी और उत्तराखंड का प्रभार छिनने की चर्चाओं पर कहा कि, इन झूठी बातों का मैं भी मजा ले रहा हूं..आप भी लीजिए। शुक्रवार को यह चर्चा उड़ी थी कि नसीमुद्दीन सिद्दीकी सेे बसपा सुप्रीमो ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड का प्रभार छीन लिया है। लेकिन शनिवार को समीक्षा बैठक में चंदौसी सीट से प्रत्याशी घोषित करके नसीमुद्दीन ने स्पष्ट संदेश दे दिया कि पार्टी में उनकी हैसियत बरकरार है।
मेरठ से लखनऊ जा रहे बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शनिवार को मुरादाबाद मंडल की समीक्षा बैठक से पहले पत्रकार वार्ता में स्वामी प्रसाद मौर्य को घर का कचरा बताया। कहा कि कचरा दूर होता है तो घर साफ होता है। विधानसभा चुनाव की रणनीति पर बोले, जल्द पता चल जाएगा।
चंदौसी से ब्रह्मावती बसपा की प्रत्याशी
पाकबड़ा (मुरादाबाद)। संभल जिले की चंदौसी विधानसभा सीट से ब्रह्मावती बसपा की कंडीडेट होंगी। बसपा के राष्ट्रीय महासचिव एवं पश्चिमी उत्तर प्रदेश के प्रभारी नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने शनिवार को बसपा की मंडलीय बैठक में उनके नाम की घोषणा की तो बसपा कार्यालय तालियों की गड़गड़ाहट और मायावती एवं नसीमुद्दीन सिद्दीकी जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा।
ब्रह्मावती बसपा के जोनल कोआर्डिनेटर और पूर्व विधायक गिरीश चंद्र की पत्नी हैं। शनिवार को बसपा की मंडलीय बैठक के दौरान ही ब्रह्मावती का काफिला बसपा कार्यालय पहुंचा। चंदौसी के साथ ही मुरादाबाद से बसपाई उनके साथ पहुंचे थे। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा सुप्रीमो मायावती की ओर से उन्हें चंदौसी से विधानसभा उम्मीदवार घोषित किया।
कैडर को पढ़ाया महापुरुषों के त्याग- बलिदान का पाठ
पाकबड़ा (मुरादाबाद)। नसीमुद्दीन सिद्दीकी ने बसपा कैडर को एक घंटे तक महापुरुषों के त्याग और बलिदान का पाठ पढ़ाया। डा. भीमराव अंबेडकर से लेकर ज्योतिबा फुले तक तमाम महापुरुषों के बारे में जानकारी देते हुए जोर दिया कि किस तरह बसपा संस्थापक कांशीराम और बसपा सुप्रीमो मायावती ने दलितों के हित का उत्थान किया है। मुस्लिम समाज को बसपा ने सत्ता में शामिल कर सम्मान दिया। यह भी चेताया कि बसपा की ताकत देखकर विरोधी दल घबरा गए हैं। विरोधियों के बहकावे में आने से बचें। बहुजन समाज और मुस्लिम समाज को बसपा के साथ संगठित करें।