मुरादाबाद। डॉलर की कीमत बढ़ने से हस्तशिल्प उत्पाद से जुड़े जिले के तमाम कामगारों की कमर टूटती जा रही है। पिछले तीन महीने में रा- मेटेरियल के दाम में करीब 10 प्रतिशत का उछाल आया है। इससे रा मेटेरियल आयात करने वालों को काफी परेशानी हो रही है। आयातकों का कहना है कि जो रा मेटेरियल तीन महीने पहले 225 रुपये प्रति किलो मिलता था, उसकी कीमत अब 250 रुपये प्रति किलो हो गई है। रा मेटेरियल के दाम बढ़ने से मुनाफा घट गया है।
मुरादाबाद जिले में हस्तशिल्प से जुड़े करीब दो हजार से अधिक कारखानेदार हैं। इसमें करीब 50 हजार कारीगर काम करते हैं। यह सभी जिले के 2200 निर्यात इकाइयों को हस्तशिल्प उत्पादों के आर्डर तैयार कर सप्लाई करते हैं। उत्पाद तैयार कराने के लिए कारखानेदारों को पीतल, तांबे और अन्य धातुओं की सिल्लियों की जरूरत पड़ती है। सिल्लियां स्क्रैप माल से तैयार की जाती हैं। इसके लिए आयातक स्क्रैप माल विदेशों से मंगाते हैं और भट्ठियों में सिल्लियां तैयार करते हैं। रुपये की कीमत गिरने की वजह से स्क्रैप माल लगातार महंगा हो रहा है। इसके कारण जिले के स्क्रैप आयातकों का मुनाफा घट गया है।
स्क्रैप का आयात करने वाले शहर के कारोबारियों का कहना है कि डॉलर की कीमत बढ़ने की वजह से रा मेटेरियल के दाम बढ़ोतरी हुई है लेकिन उन्हें इसकी सही कीमत नहीं मिल पा रही है। इसकी वजह से एल्युमिनियम और ब्रास की सिल्लियों का दाम निकालना मुश्किल हो जा रहा है। कारोबारियों का कहना है कि रुपये की घटती कीमतों का असर आयातकों पर ही नहीं बल्कि भट्ठियों और कारखानों में काम करने वाले कामगारों पर भी पड़ रहा है। सिल्लियों के दाम बढ़ने से कई महीने से कामगारों की मजदूरी भी नहीं बढ़ाई गई है।
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इन देशों से मंगाया जाता है स्क्रैप
-मुरादाबाद में एल्युमिनियम और ब्रास के स्क्रैप माल यूएई, साउथ अफ्रीका, बहरीन, कतर, जार्डन और दुबई से मंगाए जाते हैं। स्क्रैप कारोबारियों का कहना है कि हस्तशिल्प उत्पाद के आर्डर मिलने के बाद अगर एल्युमिनियम और ब्रास का रेट बढ़ा तो दाम निकालना मुश्किल हो जाता है।
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हर साल 50 हजार किलोग्राम स्क्रैप किया जाता है आयात
-हैंडीक्रॉफ्ट डेवलेपमेंट सोसायटी के अध्यक्ष व स्क्रैप कारोबारी मोहम्मद नोमान मंसूरी का कहना है कि पीतलनगरी में हर साल 50 हजार किलोग्राम स्क्रैप माल आयात किया जाता है। इसके लिए पहले से आर्डर देना होता है। स्क्रैप माल से एल्युमिनियम और ब्रास को अलग-अलग किया जाता है। इसके बाद इसे भट्ठियों में गलाकर सिल्ली तैयार की जाती है।
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-तीन महीने पहले डॉलर 87.85 रुपये था लेकिन आज डॉलर 90.55 रुपये पर चल रहा है। विदेशों से स्क्रैप को डॉलर में खरीदते हैं, इसलिए डॉलर की मजबूती से स्क्रैप माल महंगा पड़ रहा है। हस्तशिल्प उत्पाद का दाम नहीं बढ़ने की वजह से स्क्रैप माल के बनी सिल्लियों का दाम नहीं निकल पा रहा है।- मोहम्मद नोमान मंसूरी, प्रेसिडेंट, हैंडीक्रॉफ्ट डेवलेपमेंट सोसायटी
-डालर के बढ़ने से माल के दाम बढ़ गए हैं। जिन कारखानेदारों ने पहले से आर्डर लिया है, वह इसे रोकने के लिए मजबूर हैं। कारखानेदार सिल्लियों का दाम बढ़वाने के लिए मजबूर हैं। इसकी वजह से बाजार में समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर स्क्रैप माल के दाम कम नहीं हो रहे हैं।- आजम अंसारी, अध्यक्ष स्क्रैप कारोबारी एवं कारखानेदार एसोसिएशन
-निर्यातकों से हस्तशिल्प उत्पाद बनाने का आर्डर तो ले लिया। डॉलर की कीमत बढ़ने की वजह से एल्युमिनियम और ब्रास की सिल्लियां महंगी मिल रही हैं। ब्रास के हस्तशिल्प उत्पाद तैयार करने के आर्डर के दाम से सिल्ली खरीदने का रेट 25 रुपये अधिक है।- जफर खान, स्क्रैप कारोबारी
-डॉलर की मजबूती से ब्रास का काम खत्म होता जा रहा है। अब ब्रास के उत्पाद कम बनाए जा रहे हैं। स्क्रैप माल के दाम लगातार बढ़ने की वजह से हस्तशिल्प उत्पादों के मूल्य भी बढ़ेंगे। इस समय कोई भी निर्यातक दाम बढ़ाने के लिए तैयार नहीं है। इसकी वजह से एल्युमिनियम और ब्रास के स्क्रैप माल का दाम नहीं निकल पा रहा है।- शानू मंसूरी, स्क्रैप कारोबारी