आजम ने कहा कि मैंने कल भी कहा था कि मुझे हिम्मत और ताकत दीजिए, मेरी खताओं का हिसाब करें। आजम खां ने कहा कि मेरी जिंदगी में मुझे नहीं समझ पाओगे, लेकिन मेरे बाद मुझे बहुत याद करोगे। उन्होंने कहा कि मेरे ऊपर इल्जाम लगाने वालों मैं किसी की पौने चार बीघा जमीन क्या हड़पुंगा, मैंने सैकड़ों एकड़ जमीन में तुम्हारे बच्चों के लिए शिक्षण संस्थान बनवाया है।
भावुक होकर आजम ने कहा कि हमारी मां पर मुकदमा कायम है, हमारी बड़ी बहन को घसीटते हुए थाने ले गए, मेरे बुजुर्ग भाई पर 307 का मुकदमा है। मैं और अब्दुल्ला इलाहाबाद में थे जब हमपर 307 का मुकदमा दर्ज किया गया। आजम यह बोलते हुए रो पड़े कि यह गैरत हमें लेकर डूब गई कि मरने के बाद हमपर मुर्गियां, बकरियां चोरी करने का भी इल्जाम रहेगा।