मुरादाबाद। लंबे समय से अधूरा पड़ा सोनकपुर ओवरब्रिज जुलाई के आखिर और गोविंदपुरम ओवरब्रिज नवंबर तक पूरा होने की उम्मीद है। मंडलायुक्त ने मंगलवार को सेतु निगम और रेलवे के अधिकारियों से बातचीत कर निर्माण में आने वाली बाधाओं को दूर कर जल्द निर्माण कार्य पूरा करने के लिए कहा है।
शहर में जलभराव, रामगंगा किनारे अवैध कब्जे, नालों पर कब्जे और अधूरे पड़े ओवरब्रिज सहित कई समस्याएं बनी थीं। संबंधित विभागीय अधिकारी एक दूसरे विभाग का काम बताकर टाल रहे थे। लिहाजा मंडलायुक्त आंजनेय कुमार ने सोमवार सुबह साढ़े सात बजे नगर निगम, जलनिगम, सिंचाई, बाढ़, जलनिगम, आदि विभागीय अधिकारियों को साथ लेकर शहर का दौरा किया। मंडलायुक्त ने बताया गोविंदनगर ओवरब्रिज पर कुछ जमीन और उस पर काम कराने आदि को लेकर रेलवे और नगर निगम में कुछ विवाद था। इस वजह से काम अधूूरा था। इस पर दोनों विभागीय अधिकारियों से मौके पर ही बात की गई। दोनों ने अपनी बात रखी। रेलवे के डीआरएम भी आ गए थे। मंडलायुक्त ने बताया कि वार्ता के बाद मसला सुलझा लिया गया। बकौल मंडलायुक्त डीआरएम ने सोनकपुर ओवरब्रिज का काम जुलाई के अंत तक और गोविंदपुरम ओवरब्रिज नवंबर तक पूरा करने का भरोसा दिया है।
सड़कों को दुरुस्त करने के लिए निर्देश
मंडलायुक्त के अनुसार आशियाना, रामगंगा विहार, रेलवे स्टेशन के सामने सड़क टूटी हालत में मिली। नालों पर बड़ी-बड़ी दुकानें, मकान बने हैं इस कारण सफाई में दिक्कतें आ रही हैं। नगर निगम के अधिकारियों ने बताया कि जलनिगम ने सीवर लाइन डालने के बाद सड़कें तोड़ दी हैं उन्हें ठीक नहीं कराया। काम अधूरा छोड़ दिया गया है जिससे हालत खराब हो गई है। जलभराव होता है। जलनिगम के अधिकारियों से पूछा गया तो उन्होंने बताया कि रामगंगा किनारे नगर निगम द्वारा दी गई जमीन पर कोई व्यक्ति स्टे ले आया है इस वजह से एसटीपी का काम रुक गया है। इसी वजह से सीवर लाइन डालने का काम भी रोक दिया गया है। मंडलायुक्त ने नगर निगम अधिकारियों को हिदायत दी कि इस मामले को प्राथमिकता पर सुलझाया जाए। जलनिगम अधिकारियों को सख्त हिदायत दी गई कि वे सड़कों को दुरुस्त करके दें। नालों पर अवैध निर्माण करने वालों पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए। गुलाबबाड़ी एसटीपी का निरीक्षण किया।
बाजार में बनाए मिल्क फीडिंग सेंटर बनाएं
मंडलायुक्त ने बताया कि नगर निगम अपने कार्यालय और बड़े सार्वजनिक स्थानों, बाजार में नवजात शिशुओं को दूध पिलाने के लिए मिल्क फीडिंग सेंटर बनाए। दुधमुंहे बच्चे के साथ घर से बाहर आने वाली महिलाओं के लिए इस प्रकार के सेंटर सार्वजनिक स्थानों पर होने जरूरी हैं। जहां वह बच्चों को दूध पिला सकें।