मुरादाबाद। स्वच्छता सर्वेक्षण 2020 के दूसरे क्वार्टर की जारी सूची में अपने शहर की स्थित संतोषजनक नहीं है। ओवर ऑल रैंकिंग में मुरादाबाद 562 वें स्थान पर है। यह हाल तब है जब नगर निगम प्रशासन स्वच्छता की मुहिम के तहत प्रचार प्रसार लेकर सौंदर्यीकरण आदि के तमाम प्रयास किए जाने का दावा करता रहा है। खास बात यह है कि इस सर्वेक्षण में जमीनी हकीकत नहीं परखी गई है। नगर निगम प्रशासन द्वारा भेजे गए आंकड़ों, शहरवासियों के फोन नंबरों व टोल फ्री नंबर पर हुई शिकायतों को ध्यान में रखते हुए रैंक दी गई है। अभी तीसरी और चौथी तिमाही का सर्वेक्षण होना बाकी है। इसमें शहर में स्वच्छता की जमीनी हकीकत भी परखी जाएगी। ऐसे में शहर में जहां तहां फैले गंदगी के ढेर से शहरवासियों को निजात दिलाने और अपनी कार्यशैली में सुधार नगर निगम प्रशासन ने नहीं किया तो स्थिति और भी खराब हो सकती है।
पुलिस चौकी के पास गंदगी का ढेर
शहर के मोहल्ला लालबाग स्थित पुलिस चौकी से कुुछ दूरी पर मुख्य सड़क के किनारे कूड़े का ढेर अक्सर पड़ा रहता है। इससे निकलने वाली बदबू आसपास के दुकानदारों से लेकर उधर से गुजरने वालों तक को दिक्कत पैदा करती है। मोहल्ला निवासी मोहम्मद सलाम ने बताया कि नगर निगम प्रशासन की अनदेखी के चलते यहां पड़ी रहने वाली गंदगी पर दिन भर आवारा पशु मुंह मारते रहते हैं। इससे निकलने वाली बदबू से लोगों को खासी परेशानी होती है। कई-कई दिन बाद नगर निगम के कर्मचारी यहां से कूड़ा उठाने आते हैं।
सड़क पर चल रही डेरी
शहर का मोहल्ला नवाबपुरा मिश्रित आबादी वाला है। इस मोहल्ले में भी कई स्थानों पर गंदगी के ढ़ेर पड़े दिखाई दिए। यही नहीं इस मोहल्ले से गुजरी मुख्य सड़क पर आगे चलने पर दोनों ओर रहने वाले लोगों ने सड़क किनारे भैंसे बांध रखीं हैं। यह लोग डेरी चलाते हैं। भैंसे बंधी रहने से यहां सड़के तो संकरी हो ही गई हैं। यहां कीचड़ पूरी सड़क पर बिखरा रहता है। इससे लोगों का उस सड़क से निकलना दूभर है। लोगों ने कई बार इसकी शिकायत भी की, लेकिन नगर निगम प्रशासन इस ओर कोई ध्यान नहीं देता है। मोहल्ला निवासी चरनसिंह ने बताया कि नगर निगम के सफाईकर्मचारी महज खानापूर्ति करते हैं। शिकायत पर नगर निगम प्रशासन कोई ध्यान भी नहीं देता।
मानसरोवर कॉलोनी के पार्क के पास गंदगी
शहर की पॉश कॉलोनी में शुमार मानसरोवर व सरोवर कॉलोनी पास-पास हैं। दोनों कॉलोनियों के बीच एक नाला भी बहता है। मोहल्लेवालों की मानें तो नगर निगम उसकी सफाई तक कराने की जहमत नहीं उठाता। नगर निगम प्रशासन ने तीन साल पहले कॉलोनीवासियों की सुविधा के लिए एक पार्क तो बनवा दिया है, लेकिन नाले से निकलने वाली बदबू पार्क में टहलने निकले लोगों को नाक पर हाथ रखने को मजबूर कर देती है। पार्क के मध्य में एक पुराना सीवर ट्रीटमेंट प्लांट का कुआं हैं। जिसमें अक्सर खेलते बच्चों के उसमें गिर जाने का खतरा बना रहता है। मोहल्लेवालों ने बताया कि कई बार इस ओर ध्यान नगर निगम प्रशासन का दिलाया गया, लेकिन नतीजा ढाक के तीन पात ही रहा।
खुद पैसा एकत्र कर कराते सफाई
सरोवर नगर निवासी अंकुर शर्मा ने बताया कि नगर निगम प्रशासन पार्क के पास पड़ी गंदगी की सफाई तक नहीं कराता। न अधिकारी सुनते हैं न कर्मचारी। मोहल्ले की सड़क बनवानी हो या सफाई। मोहल्ले के लोग आपस में चंदा कर मजदूर लगा खुद करवाते हैं। मान सरोवर के सफाई कर्मचारी उस स्थान को सरोवर कॉलोनी का बताकर तो सरोवर कॉलोनी के कर्मचारी उस स्थान को मानसरोवर कॉलोनी का बताकर सफाई करने से इंकार कर देते हैं। निगम प्रशासन से शिकायत करने पर भी कोई ध्यान नहीं दिया जाता। अनिल कुमार सिंह व एनके शर्मा ने बताया कि बताया कि नगर निगम प्रशासन के अधिकारियों को फोन भी किया जाता है, लेकिन अक्सर अधिकारी फोन नहीं उठाते। कभी उठा भी लिया तो रिसपांस नहीं देते।
जमीनी हकीकत छोड़िये आंकड़ों में भी रहा फेल
मुरादाबाद। शहर में स्वच्छता की जमीनी हकीकत वास्तव में उतनी बेहतर नहीं है जितना दावा नगर निगम कर रहा है। यह बात सर्वे के दौरान भी साबित हो चुकी है। नगर निगम ने स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए की गई तैयारियों की जो रिपोर्ट भारत सरकार को भेजी उसमें मुरादाबाद को अपनी तैयारियों के मुताबिक 1537.50 अंक दिए। आंकड़ों का जब परीक्षण किया गया तो जिले को शहर को कुल 1084.58 ही मिल सके।
एक से दस लाख की आबादी में लगाई छलांग
मुरादाबाद। एक लाख से दस लाख की आबादी वाले 353 शहरों में 68वां स्थान मिला है। इससे पहले स्वच्छता सर्वेक्षण में इस श्रेणी में अपने शहर का 143 वां स्थान था। इससे साफ है कि एक से दस लाख की आबादी वाले देश के शहरों में पहले सर्वेक्षण से दूसरे सर्वेक्षण में शहर ने 75 पायदान ऊपर छलांग जरूर लगा ली है।