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Moradabad News: जेल में जिंदगी बिताने को मजबूर छह मासूम

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मुरादाबाद। अपनी मां के साथ छह मासूम भी जेल में अपना बचपन बिताने को मजबूर हैं। सलाखों के पीछे इनकी रातें बीत रही हैं तो दिन में जेल के अंदर ही पढ़ाई करते हैं और पार्क में खेलते हैं।
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जेल में 100 महिला कैदी और बंदी हैं। जिनमें छह बच्चे भी अपनी मां के साथ रह रहे हैं। हत्या और अपहरण जैसे गंभीर मामलों में कैद महिलाओं के बच्चों को उनके परिजन अपने साथ रखने को तैयार नहीं हैं। यही कारण है कि यह मासूम अपना जीवन जेल में बिता रहे हैं। जेल में रह रहे इन मासूमों की उम्र छह साल से कम है। इनमें तीन लड़के और तीन लड़कियां हैं।
पांच बच्चे अपनी मां के साथ ही यहां आए थे, जबकि एक बच्चे का जन्म जेल में ही हुआ। हत्या के आरोप में पिछले चार साल से सजा काट रही 33 साल की सुशीला सुबह होते ही अपने चार साल के बच्चे को तैयार करके पढ़ने के लिए भेजती हैं। 30 साल की शांति अपहरण के मामले में कैद हैं। वह अपने एक साल के बच्चे को साथ रख रही हैं। रात में बच्चे के रोने पर खिलौनों से बहलाती हैं। अन्य चार महिलाएं भी जेल में अपने बच्चों को पाल रही हैं।
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छह साल तक ही जेल में रह सकते हैं बच्चे

जेल अधीक्षक आलोक सिंह ने बताया कि जेल में कैद मासूम केवल छह साल की उम्र तक ही यहां रह सकते हैं। अभी तक इन बच्चों को उनके परिवार में से कोई भी लेने नहीं आया है। छह साल की उम्र पूरी हो जाने पर बच्चों को उनके परिजनों के पास या फिर संस्था में भेज दिया जाएगा लेकिन तब तक जेल प्रशासन इन बच्चों के बचपन को बेहतर बनाने का हरसंभव प्रयास कर रहा है। जेल में बच्चों के लिए एक शिक्षिका की व्यवस्था है, जो बच्चों को शिक्षा देती हैं। रोजाना बच्चे सुबह उठकर बैग व लंच के साथ क्लासरूम में पढ़ाई करने जाते हैं। साथ ही बच्चों के मनोरंजन के लिए झूले व खिलौने की भी व्यवस्था जेल में है, ताकि वह जेल के माहौल में भी खुशहाल बचपन बिता सकें। बच्चों को डॉक्टर की सलाह से संतुलित आहार, दूध और ताजे फल दिए जाते हैं। ठंड से बचाने के लिए एनजीओ द्वारा कपड़े उपलब्ध करवाएं जाते हैं। कम उम्र के बच्चे ज्यादा बीमार होते हैं इस बात को ध्यान में रखते हुए समय-समय पर डॉक्टर उनकी सेहत की जांच करते हैं।






जेल में रह रहे बच्चों में से एक की सर्वाधिक उम्र पांच साल है। छह साल की आयु पूरी होने पर बच्चों को उनके परिजनों के पास भेज दिया जाएगा। तब तक जेल उनके लिए एक सुरक्षित घर बना हुआ है। जेल प्रशासन उन्हें सामान्य बचपन देने की हरसंभव कोशिश कर रहा है, ताकि जब वह बाहर जाएं तो उन्हें खेल और शिक्षा की जानकारी हो।
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- आलोक सिंह, जेल अधीक्षक
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