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Moradabad News: जीएसटी चोरी रोकने में अधिकारियों का सहयोग करें कर अधिवक्ता

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मुरादाबाद। जीएसटी में चोरी बढ़ रही है। अधिवक्ताओं और अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि दोनों टैक्स चोरी को रोकने में एक-दूसरे का सहयोग करें। कुछ लोग तकनीक का फायदा उठाते हुए टैक्स चोरी करते हैं। जोनल टैक्स बार एसोसिएशन एवं प्रदेश कर अधिवक्ता संगठन की रामगंगा विहार स्थित मिडटाउन क्लब में आयोजित कार्यकारिणी सभा के दौरान यह बातें मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने कहीं।
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उन्होंने कहा कि तकनीक के आधार पर ही अधिकारी जीएसटी की वसूली करते हैं। फिर भी कुछ लोग चोरी का रास्ता अधिकारियों से मिलकर निकाल लेते हैं। इसी को रोकने का दायित्व राज्य कर के अधिकारियों के कंधों पर है। कर अधिवक्ता व्यापारी और विभाग के बीच सेतु का काम करते हैं। सभी का उद्देश्य कर चोरी को रोकना और राजस्व को जमा कराने के लिए होना चाहिए।
इस दौरान सीजीएसटी से सहायक कमिश्नर नवीन खत्री ने कहा कि व्यापारी अपना जीएसटी ईमानदारी से जमा करें। जिससे उनको भविष्य में कोई असुविधा न हो सके। राज्य कर के एडिशनल कमिश्नर ग्रेड-1 रमा शंकर द्विवेदी ने कहा कि पंजीकृत व्यापारी फर्जी व्यापारियों से व्यापार न करें। विभाग से संबंधित कोई समस्या होने पर उसका समाधान बैठ कर किया जाएगा।
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सभा की अध्यक्षता गुफरान माजिद और संचालन शलभ अग्रवाल, क्षितिज शर्मा,अराफात अली और राजदीप गोयल ने किया। इससे पहले सर्वप्रथम शांति निकेतन इंटर कॉलेज की छात्राओं ने सरस्वती वंदना की। मंडलायुक्त आंजनेय कुमार सिंह ने दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम की शुरुआत कराई।


विचित्र शर्मा को मिला पर्यावरण रक्षक रत्न सम्मान
सभा के दौरान अधिवक्ता जावेद बिन रशीद की स्मृति में पर्यावरण रक्षक रत्न के लिए विचित्र शर्मा को सम्मानित किया गया। शिक्षा एवं सामाजिक जागरण के लिए अनुज गुप्ता को सम्मानित किया गया। नील कुमार की स्मृति में तारिक अजीम को खेल रत्न पुरस्कार, संतोष कुमार गुप्ता की स्मृति में अनस खान को सबसे अधिक वकालतनामा लेने और प्रदीप कुमार अग्रवाल की स्मृति में गौरव गुप्ता को ज्ञान रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया गया। इस दौरान राज्य कर के एडिशनल ग्रेड -2 आरए सेठ भी उपस्थित रहे।
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सर्च के बाद कर टैक्स जमा करने का प्रावधान
सभा में मध्य प्रदेश से आए अधिवक्ता पलाश खुरपिया ने जीएसटी की सीजीएसटी एक्ट के सेक्शन 67(2) के तहत सर्च और सीजर के बारे में विस्तृत रूप जानकारी दी। बताया कि हाल में हुए न्यायिक फैसलों में इस धारा का दुरुपयोग बढ़ा है। इसी तरह कई मामलों में न्यायालय द्वारा स्पष्ट किया गया है कि किसी भी प्रकार की वसूली चाहे नकद या चेक या आईटीसी के समायोजन के आधार पर सर्च के दौरान जमा नहीं कराना चाहिए। यदि करदाता स्वयं से भुगतान करना भी चाहता है, तो सर्च समाप्त होने के बाद किया जाना चाहिए। यह फैसले इस बात पर जोर देते हैं कि करदाता जबरदस्ती से कर जमा करने से इन्कार कर सकता है। जांच अधिकारी उचित दस्तावेजों की मांग कर सकते हैं। जीएसटी सर्च का सामना कर रहे करदाता यह जान लें कि यदि कोई भुगतान जबरन लिया गया है तो यह नियम विरुद्ध होगा। इस दौरान जोनल टैक्स बार से संजीव महेश्वरी, संजीव बिहारी भटनागर, सैयद आरिफ अली, दीपक कुमार गुप्ता, गौरव गुप्ता, वैभव गुप्ता, दीपक अग्रवाल राजीव विश्नोई, जहीर मलिक आदि अधिवक्ता उपस्थित रहे।
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