कुख्यात सटोरिया साबिर कालिया और अजीम जेल की सलाखों के पीछे से सट्टा सिंडिकेट को ऑपरेट कर रहे हैं। करोड़ों रुपये महीना टर्न ओवर वाले इस धंधे में जेल के हाकिमों से लेकर शहर के खाकी वालों तक का दामन दागदार है। जेल में इन्हें खुली छूट है तो बाहर शहर पुलिस के कुछ ओहदेदारों का वरदहस्त है।
कानून की तमाम धाराएं सट्टा माफियों के रसूख तले दब गई हैं। इनकी हनक का आलम ये है जेल की बैरक में बैठकर शहर में खुलेआम सट्टे का धंधा चला रहे हैं। सट्टे का नंबर जेल की बैरक से एनाउंस किया जाता है। सट्टा माफिया साबिर कालिया और अजीम सट्टा किंग के नाम से कुख्यात रहे सटोरिये जुल्फिकार उर्फ बिट्टू की हत्या के मामले में जेल में बंद हैं।
जुल्फिकार उर्फ बिट्टू से सट्टा साम्राज्य छीनने के लिए ही दोनों ने उसे रास्ते से हटाया था। साबिर कालिया कटघर थाना क्षेत्र में जाहिद नगर का रहने वाला है और जेल जाने के बाद अपने प्यादों की मदद से सट्टा सिंडिकेट को आपरेट कर रहा है। अजीम भी साबिर कालिया के साथ ही बंद है। साबिर कालिया ने सट्टे के लिए उसे कोतवाली व नागफनी क्षेत्र का इलाका बांट रखा है।
जेल में होने के बावजूद इन दोनों की पुलिस में अच्छी पैठ है। साबिर कालिया के लोग सिपाही से लेकर साहब तक सबका बिना नागा ख्याल रखते हैं। यही वजह है कि सट्टा सिंडिकेट पर हाथ डालने के बजाए शहर की पुलिस यदाकदा छोटे मोटे सटोरियों को पकड़कर एक्शन की खानापूरी कर देती है। एक बंदी के जेल की दीवार कूदकर भाग जाने के बाद पहली बार जेल से चल रहा सट्टे का धंधा बेनकाब हुआ था। इस पर डीआईजी जेल ने जांच भी शुरू की थी।