मुरादाबाद जिले के हजरत नगर गढ़ी थाने में शुक्रवार दोपहर थर्ड डिग्री से रिटायर्ड सिपाही मैराजुल के बेटे शबलू की मौत हो गई। पुलिस उसे वाहन चोरी के मामले में पूछताछ के लिए थाने लाई थी। बताया जा रहा है कि सिपाही का बेटा पुलिस पिटाई सहन नहीं कर आया और उसने थाने में ही दम तोड़ दिया।
पुलिस अपनी गर्दन बचाने के लिए युवक को इलाज के लिए बिलारी अस्पताल लेकर पहुंची। जहां डॉक्टरों ने ब्राट डेड घोषित कर दिया। खबर मिलने पर परिजन पहुंच गए। उन्होंने हिरासत में शबलू को पीटकर मार डालने का आरोप लगाते हुए हजरत नगर थाने पर हंगामा किया।
सूचना मिलने पर एसएसपी मौके पर पहुंच गए और उन्होंने भड़की पब्लिक को समझाने का प्रयास किया। पुलिस का दावा है कि शबलू हिस्ट्रीशीटर था और उसके खिलाफ बीस से ज्यादा केस दर्ज हैं।
इस मामले में एसएसपी नितिन तिवारी का कहना है कि पुलिस शबलू को पूछताछ के लिए थाने लेकर आई थी। लेकिन उसकी तबीयत बिगड़ गई। बिलारी अस्पताल में उसकी मौत हो गई। पूरे मामले की जांच पड़ताल की जा रही है। जो भी दोषी पाए जाएंगे उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
शबलू के पिता बोले पांच लाख नहीं दिए तो बेटे को मार डाला
बेटा चीखता रहा और पुलिस पीटती रही। ये कहना है पुलिस हिरासत में दम तोड़ने वाले सबलू के पिता मेराजुल का। उन्होंने पुलिस पर एक लाख की रकम लेने के बाद भी नहीं छोड़ने का आरोप लगाया है। सबलू के भाई का कहना है कि पुलिस ने छोड़ने की एवज में पांच लाख मांगे थे। नहीं दे पाया तो थर्ड डिग्री देकर मार डाला।
सबलू की मौत के बाद परिजनों ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। सबलू के पिता का कहना है कि उनका बेटा चीखता रहा और पुलिस पीटती रही। पुलिस की पिटाई से ही उनके बेटे की मौत हुई है। परिजनों का आरोप है कि सबलू को छोड़ने के लिए थाना पुलिस ने एक लाख रुपये गुरुवार को शाम ही ले लिए थे।
पुलिस का कहना था कि चोरी की घटना में पूछताछ करनी है और पूछताछ के बाद शुक्रवार को सुबह छोड़ देंगे। सबलू के मामू मोहम्मद ने बताया कि वे लोग जब शुक्रवार को पहुंचे तो पुलिस ने चार लाख रुपये और मांगे और जब रुपये का इंतजाम करने में जुटे थे पर इसी बीच शुक्रवार को शाम हमें उसकी मौत की खबर मिली।
सबलू के पिता मेराजुल का कहना था कि पुलिस ने सिरसी से उनके बेटे को उठाया और वे पीछे पीछे ही थाने पहुंचे। लेकिन पुलिस ने धमका दिया। बेटे को नहीं छोड़ा। बेटा चीखता चिल्लाता रहा। हम कुछ नहींकर सके क्योंकि पुलिस ने हमें भी जेल में बंद करने की धमकी दी थी। उनके मुताबिक थाना प्रभारी और दस हमराही सिपाहियों ने उनके बेटे को सिरसी से उठाया था।