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Moradabad News: खोखों का नहीं लिया जा रहा किराया, पक्की दुकानों की वसूली भी ठप

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मुरादाबाद। शहर की व्यस्त सड़कों और प्रमुख बाजारों में दशकों से अपने खोखे और निगम की दुकानों के सहारे रोजी-रोटी चला रहे सैकड़ों छोटे कारोबारियों की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। नगर निगम की नीतिगत अनिश्चितता ने अब कारोबारियों के सामने रोजगार का संकट खड़ा कर दिया है। एक ओर जहां 634 खोखा संचालकों से बीते करीब 22 महीनों से किराया नहीं लिया जा रहा है वहीं दूसरी ओर नगर निगम की 488 पक्की दुकानों का किराया भी जनवरी से लेकर अबतक तय नहीं हो सका है। हालात यह हैं कि व्यापारी किराया जमा करने के लिए निगम कार्यालय के चक्कर काट रहे हैं लेकिन अधिकारी न तो किराया ले रहे हैं और न ही स्थिति को लेकर कोई स्पष्ट जवाब दे रहे हैं।
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व्यापारी सुरक्षा फोरम के पदाधिकारियों का कहना है कि खोखा संचालक 30 से 35 वर्षों से एक ही स्थान पर कारोबार कर रहे हैं और अब तक नियमित रूप से किराया जमा करते आए हैं। लेकिन अचानक किराया वसूली बंद कर दिए जाने से व्यापारियों के मन में आशंका गहराने लगी है कि कहीं नगर निगम बिना पूर्व सूचना इनके खोखे हटाने की तैयारी तो नहीं कर रहा है। शहर में प्रभात मार्केट, टाउनहाल, बुध बाजार, गुरहट्टी, जेल रोड, स्टेशन रोड, डबल फाटक समेत कई इलाकों में यह खोखे संचालित हैं। इन सभी स्थानों पर किराया वसूली बंद होने से 634 परिवारों का आर्थिक ढांचा डगमगा गया है।
वहीं दूसरी ओर नगर निगम की पक्की दुकानों का भी अबतक किराया निर्धारित नहीं हो सका है। जनवरी से ही किराये की वसूली ठप है और एक साल बीतने को है लेकिन अबतक निगम किराया तय नहीं कर सका है। किराया बढ़ोतरी करने के बाद व्यापारियों ने विरोध किया था तो निगम को कार्यकारिणी की बैठक में बैकफुट पर जाते हुए बढ़ोतरी का फैसला वापस लेना पड़ा था। महापौर ने कमेटी का गठन कर किराया तय करने की बात कही थी लेकिन इस कमेटी की दो बार बैठक हुई और दोनों ही बार वह बेनतीजा रही।
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निगम में नेता विपक्ष अनुभव मेहरोत्रा का कहना है कि किराये को लेकर दो बार बैठक हुई लेकिन कोई फैसला नहीं हो सका। संयुक्त व्यापार मंडल के प्रदेश महामंत्री विपिन गुप्ता का कहना है कि जल्द ही इसका निस्तारण होना चाहिए ताकि व्यापारी बिना किसी परेशानी के अपनी दुकानें संचालित कर सकें। वहीं खोखा संचालक अश्विनी, प्रभात का कहना है कि उन्हें नहीं मालूम किराया क्यों नहीं लिया जा रहा है। कई व्यापारी किराया जमा करने निगम कार्यालय पहुंचे लेकिन उनसे किराया नहीं लिया गया। मालूम नहीं कि निगम की क्या योजना है। किराया न वसूले जाने से निगम को राजस्व का गहरा नुकसान तो हो ही रहा है। साथ ही दुकानदारों के सामने भी यह संकट खड़ा हो गया है कि जब किराया तय होगा तो क्या उनसे पिछला सारा किराया एक साथ वसूला जाएगा या उन्हें छूट प्रदान की जाएगी।
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- पार्षदों की कमेटी ने किया था विरोध
मुरादाबाद। किराया तय करने के लिए महापौर ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित की थी। अपर नगर आयुक्त के साथ हुई बैठक में इन पार्षदों की समिति ने सर्किल रेट के आधार पर किराया तय करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया था और बैठक का बहिष्कार कर दिया था। पार्षदों का कहना था कि जिन दुकानों का किराया अभी 300-500 रुपये है वह सर्किल रेट लागू होने पर 12 से 15 हजार रुपये तक पहुंच जाएगा। व्यापारियों को तार्किक वृद्धि स्वीकार्य है लेकिन सर्किल रेट के अनुसार किराया उन्हें स्वीकार्य नहीं है। ब्यूरो


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पार्षदों की समिति ने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है। इस रिपोर्ट पर मंथन की प्रक्रिया चल रही है। आगामी कार्यकारिणी की बैठक में किराया निर्धारण को लेकर निर्णय लिया जाएगा। - विनोद अग्रवाल, महापौर
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