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जब शूट नहीं की गई तो कहां गई नीलगाय

Sat, 11 Jun 2016 11:37 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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नीलगाय
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नीलगाय के मारे जाने पर केंद्र सरकार के दो मंत्रियों में वाकयुद्ध चल रहा है, लेकिन मंडल में तीन साल बाद होने वाली गणना में 3522 नीलगायों की संख्या घटना चिंताजनक  है। जब शूट नहीं की जा रहीं तो नीलगाय कहां जा रही हैं? वर्ष 2013 में हुई गणना में मंडल में नीलगायों की संख्या 18746 थी, अब मौजूदा समय में नीलगायों की संख्या घटकर 15224 रह गई है। तीन साल में करीब 3522 नीलगाय घटी हैं। इससे साफ जाहिर है कि कहीं न कहीं नीलगायों को मारा जा रहा है।
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हालांकि वन विभाग के रिकार्ड के मुताबिक इस साल सिर्फ संभल जिले में एक नीलगाय के शिकार का मामला सामने आया है जिसकी रिपोर्ट दर्ज हुई है। नीलगाय क्यों घट रही हैं इसका कोई कारण स्पष्ट नहीं है। संभल जिले में सर्वाधिक 6990 नीलगाय हैं तो मुरादाबाद में सबसे कम 1612 नीलगाय ही गणना में पाई गई हैं। मंडल में नीलगायों की संख्या क्यों घट रही है, इसके पीछे वन अधिकारियों का तर्क है कि यह झुंड में रहने वाले जंगली जानवर हैं इनका मूवमेंट स्थिर नहीं रहता।

कभी कहीं अधिक संख्या में एकजुट हो जाते हैं तो झुंड कभी वह स्थान छोड़कर और दूसरे जंगलों में पहुंच जाते हैं। लेकिन इसके विपरीत अक्सर वाहनों से टक राकर भी नीलगायों की मौत होती रहती है। जंगलों में भी नीलगाय मरी पायी जाती हैं। वर्ष 2013 में हुई गणना में 18746 नीलगायों की संख्या पाई गई थी। 2016 में चल रही गणना में 15224 नीलगाय पाए गए हैं। इस संख्या से स्पष्ट है कि चाहे कैसे भी घट रहे हैं, तीन साल में 3522 नीलगाय घट चुके हैं। इससे लग रहा है कि शिकारी गुपचुप तरीके से नीलगाय को मारकर उसे गायब कर रहे हैं। 
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गणना में जिलेवार नीलगायों की संख्या 
जिला             वर्ष 2013       वर्ष 2016
मुरादाबाद         1612                1612   
रामपुर             2014                1618
संभल             8200                6990
अमरोहा           2168                2212
बिजनौर           3903                2084
नजीबाबाद          849                707

संभल में हुआ नीलगाय-काले हिरन का शिकार 
वन विभाग के आंकड़ों के मुताबिक 19 अप्रैल 2016 को संभल के गांव सिहंदलनपुर में एक नीलगाय का शिकार हुआ, इसे गोलीमारी गई, जिसकी रिपोर्ट संबंधित धाराओं में दर्ज कराई गई। संभल के गांव हरगोविंदपुर में 21 अप्रैल को एक काले हिरन को गोलीमारी गई थी, इस मामले में भी रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी। 

खाने से ज्यादा रौंदकर फसल करते हैं बर्बाद 
नीलगाय फसलों को खाने से ज्यादा रौंदकर बर्बाद कर देते हैं। नीलगायों का झुंड एक साथ निकलता है और फसलों को खाता है। जितनी फसल खाता है उससे कहीं ज्यादा बर्बाद कर देता है। मुरादाबाद जिले में बिलारी और पाकबड़ा क्षेत्र में फसलों के नुकसान के मामले अधिक हैं। इसके अलावा संभल और अमरोहा से भी फसलों के नुकसान के मामले अधिक हैं। 
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