मुरादाबाद। निजी अस्पतालों के सहयोग से रेड क्रॉस की झोली भरी तो इसका लाभ गरीब मरीजों को जिला अस्पताल में कूल्हा और घुटना प्रत्यारोपण के लिए मिला। प्रत्यारोपण के विशेषज्ञ समेत पांच डॉक्टरों की टीम जिला अस्पताल में चार ऑपरेशन कर चुकी है। बुधवार को सिविल लाइंस निवासी वीर सिंह का कूल्हा बदला गया। निजी अस्पताल में इसका खर्च डेढ़ लाख रुपये है।
मरीज के पास आयुष्मान कार्ड भी नहीं है। अस्पताल की ओपीडी में वीर सिंह का बेटा उन्हें हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. एसएस कक्कड़ के पास लेकर पहुंचा। वीर सिंह को काफी समय पहले चोट लगी थी। एक्स-रे कराने पर पता चला कि उनका कूल्हा बदलना पड़ेगा। डॉ. कक्कड़ ने जिला अस्पताल की प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संगीता गुप्ता को बताया।
उन्होंने सरकारी बजट से मरीज के लिए कूल्हा मंगवाया और सफल प्रत्यारोपण हो गया। इससे सप्ताह भर पहले पांच जून को सिविल लाइंस की आंबेडकर कॉलोनी निवासी सावित्री (50) के घुटने का सफल प्रत्यारोपण जिला अस्पताल में हुआ था।
यह सर्जरी रेडक्रॉस से मिली राशि से की गई। आयुष्मान कार्ड न होने के कारण डीएम से मदद की गुहार लगाई थी। डीएम ने सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह को मार्क किया और रेडक्रॉस से फंड मिल गया। जिला अस्पताल में घुटना मंगाकर मरीज की सर्जरी कर दी गई। डॉक्टर दूसरे घुटने का प्रत्यारोपण करने के लिए भी तैयार हैं लेकिन महिला ने एक माह का समय मांगा है। करीब डेढ़ माह पहले 24 वर्षीय मो. रजी के कूल्हे का प्रत्यारोपण भी रेडक्रॉस के फंड से किया गया था।
निजी अस्पतालों से अपील का हुआ असर
वर्तमान में नए सत्र के लिए अस्पतालों का पंजीकरण चल रहा है। चूंकि असलहों के लाइसेंस नहीं बन रहे हैं इसलिए रेडक्रॉस के फंड की किल्लत हो गई थी। इस बीच निजी अस्पतालों से अपील की गई कि पंजीकरण के बाद वह रेडक्रॉस सोसायटी के लिए पर्ची कटाएं। अपील का असर हुआ और जरूरतमंदों की मदद के लिए रेडक्रॉस की झोली भरनी शुरू हो गई। इसके कारण जिला अस्पताल में मरीजों को लैप्रोस्कोपी विधि से सर्जरी, कूल्हा और घुटना प्रत्यारोपण जैसी मदद मिल रही है। जबकि निजी अस्पतालों में प्रत्यारोपण का खर्च 1.5 से तीन लाख रुपये तक आता है।
टीम में यह डॉक्टर शामिल
- डॉ. हरवीर सिंह, ऑर्थोपेडिक सर्जन
- डॉ. शेर सिंह कक्कड़, ऑर्थोपेडिक सर्जन
- डॉ. वसीम खान, ऑर्थोपेडिक सर्जन
- डॉ. शोभित, ऑर्थोपेडिक सर्जन
- डॉ. प्रदीप शर्मा, एनेस्थेटिस्ट
वर्जन (फोटो)
दो मरीजों की सर्जरी रेडक्रॉस के फंड से की गई है। एक मरीज का ऑपरेशन जिला अस्पताल के बजट से किया गया है। इन मरीजों के पास आयुष्मान कार्ड नहीं हैं। जल्द ही हमारी टीम एक और इंप्लांट करने वाली है।
- डॉ. शेर सिंह कक्कड़, ऑर्थोपेडिक सर्जन
जिलाधिकारी व सीएमओ की मदद से रेडक्रॉस सोसायटी से फंड मिला। मरीज के लिए इंप्लांट का सामान मंगवाया और हमारे डॉक्टरों ने सर्जरी की। जिला अस्पताल में यह सेवा शुरू होने से मरीजों का विश्वास बढ़ा है।
- डॉ. संगीता गुप्ता, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक