मुरादाबाद। राज्य कर विभाग ने मंडल की 67 शेल कंपनियों के जरिये 73 करोड़ से अधिक की जीएसटी चोरी पकड़ी है। प्रारंभिक जांच के बाद अधिकारियों ने 15 शेल कंपनियों का पंजीकरण निरस्त कर दिया है। शेष 52 शेल कंपनियों की जांच जारी है। अब राज्य कर विभाग सीजीएसटी के अधिकारियों के साथ मिलकर शेल कंपनियों के मालिकों के खिलाफ कार्रवाई करेगा।
मुरादाबाद जिले के ठाकुरद्वारा, रामपुर, संभल, अमरोहा और बिजनौर में काफी दिनों से लकड़ी के कारोबारी शेल कंपनियों के माध्यम से जीएसटी चोरी कर सरकार को चूना लगाने का काम कर रहे हैं। इसकी जानकारी मिलने पर जब राज्य कर विभाग ने इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) क्लेम की जांच कराई तो फर्जीवाड़ा सामने आने लगा।
अपर आयुक्त ग्रेड-2 आरए सेठ के निर्देश पर व्यावसायिक कर अधिकारी (सीटीओ) के नेतृत्व में टीमें ठाकुरद्वारा भेजी गईं। जांच में पता चला कि परचून और मिठाई की दुकान के नाम पर लकड़ी का कारोबार दिखाया गया था। कुछ लकड़ी कारोबारी उत्तराखंड से बिना कागज शेल कंपनियों से माल खरीदते थे। साथ ही माल की अन्य जिलों में आपूर्ति करते थे। इसके जरिये वह लकड़ी के कारोबार पर लगने वाले 18 प्रतिशत कर की चोरी कर रहे थे।
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ऐसे पकड़ा गया खेल
कुछ फर्मों ने अपना माल हरियाणा और अन्य प्रांतों में बेचना दर्शाया। नियमानुसार केंद्र सरकार ने यूपी सरकार से 50 प्रतिशत आईटीसी के तौर पर वसूल लिया।राज्य कर की जांच में पता चला कि कारोबारियों ने शेल कंपनियों के जरिये सरकार से पैसा वसूलने का खेल किया। कारोबारियों ने शेल कंपनियों के लाइक वुड, चैलेंज वुड जैसे नाम रखे थे। इस प्रकार का खेल ठाकुरद्वारा के साथ ही रामपुर, अमरोहा, संभल व बिजनाैर जिले में भी हुआ है।
इस तरह कराया था पंजीकरण
जीएसटी के नियम के अनुसार प्रदेश में दो कारोबारी पंजीयन कराते हैं तो एक का नाम एसजीएसटी और दूसरे की फर्म का नाम आटोमेटिक सीजीएसटी में चला जाता है। कर चोरी के खेल में लिप्त कारोबारियों ने अपनी फर्मों के दो-दो पंजीयन अलग-अलग नामों से सीजीएसटी और एसजीएसटी में कराए हैं। इसके लिए फर्जी अभिलेख भी तैयार कराए गए थे। राज्य कर विभाग में अभिलेख की जांच तत्काल हो जाती है। इस कारण उन्होंने सीजीएसटी को माध्यम बनाया। सीजीएसटी के माध्यम से फर्म का माल गैर प्रांतों में भेज दिया था। आईटीसी क्लेम कर फर्मों ने पैसा लिया। चूंकि, रिफंड में देरी होने पर ब्याज भी देना होता है। इस कारण विभागीय अधिकारी क्लेम का शीघ्र निस्तारण भी कर देते हैं, लेकिन जब जांच हुई तो खेल सामने आ गया।
अब जीएसटी चोरी में लिप्त फर्मों पर होगी कार्रवाई
अपर आयुक्त ग्रेड-2 आरए सेठ ने कहा कि कर चोरी के खेल को सीजीएसटी के अधिकारियों से मिलकर डीकोड किया जाएगा। भौतिक सत्यापन कर यूपी का पैसा केंद्र से वापस कराया जाएगा। साथ ही इस खेल में लिप्त लोगों पर कार्रवाई की जाएगी। इस मामले में जांच के आधार पर विभागीय कार्रवाई करते हुए पंजीकरण निरस्त किए जाएंगे। पहले भी शेल कंपनियों का मामला प्रकाश में आने पर राज्य कर के अधिकारियों ने कार्रवाई की है। इस मामले में उच्चाधिकारियों को रिपोर्ट भेजी जाएगी, जिससे कर चोरी रोकी जा सके।