एक बार फिर असत्य पर सत्य की जीत हुई। विजयदशमी के के पावन पर्व पर बुराई के प्रतीक लंकापति दशानन रावण का पुतला दहन किया गया। मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम के धनुष से निकला अग्नि बाण जैसे ही असत्य व अधर्म के प्रतीक रावण की नाभि पर लगा वैसे ही वह जमीन पर गिर गया और गोकुलवासी हो गया।
धूं-धूं कर अहंकार रूपी रावण का पुतला जलते ही रामलीला मंचन देख रहे लोगों ने एक-दूसरे को विजय पर्व की बधाई दी। लाईनपार व लाजपत नगर स्थित रामलीला मैदान और दीनदयाल नगर के नेहरू युवा केंद्र समेत महानगर के अनेक स्थानों पर रावण के पुतले दहन किये गये।
लाइनपार रामलीला
श्री रामलीला क मेटी के तत्वाधान में रामलीला ग्राउंड में चल रही रामलीला में नूतन कला संगम के कलाकारों द्वारा मंचन प्रस्तुत कर विजय दशमी उत्सव मनाया गया। रावण का 98 फीट का पुतला दहन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पताका समारोह से हुआ। रामलीला ग्राउंड में चारों तरफ राम दरबार व अन्य सुंदर झांकियां मैदान में चारों ओर घूमी।
रावण व मेघनाद दहन से पूर्व मंचन में सर्वप्रथम रामजी की वानर सेना और रावण की सेना के बीच युद्ध प्रारंभ होता है। जिसमें रावण की सेना वानरों की सेना के आगे नतमस्तक हो जाती है। फिर रामजी और रावण के बीच युद्ध प्रारंभ होता है।
रावण एक-एक करके अपनी शक्तियों का प्रयोग करता है और भगवान राम अपने धनुषकोष से तीरों का प्रयोग करते है। काफी देर तक दोनों के बीच चल रहे युद्ध का परिणाम नहीं आता है तो तो लंकेश के छोटे भाई व रामभक्त विभीषण भगवान श्रीराम को बताते है दशानन को मृत्यु को लेकर वरदान मिला हुआ है।
उसके बाद रामजी ने रावण की नाभि में वहां पर तीर मारा जहां अमृत संचित था, तीर लगते ही पूरा अमृत सूख गया और अहंकारी लंकापति रावण जमीन पर गिर गया। इसके बाद राम के अग्नि बाण से रावण का प्रतीकात्मक पुतला दहन हो गया। रावण के पुतले से पूर्व मेघनाद के छोटे पुतले का भी दहन किया गया।
भगवान राम का विजय तिलक हुआ। मंचन का निर्देशन नूतन कला संगम के पंकज सोती राजू ने किया। रावण दहन के दौरान जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक नितिन तिवारी, महापौर विनोद अग्रवाल आदि उपस्थित रहे।
लाजपत नगर रामलीला
श्री रामकथा मंचन समिति द्वारा लाजपत नगर स्थित महाराजा हरिश्चंद्र डिग्री कालेज के प्रांगण में दशहरा उत्सव संपन्न हुआ। रावण का 30 फीट का पुतला दहन किया गया। बृजलोक लीला संस्थान वृंदावन के कलाकारों द्वारा मंचन किया गया।
जिलाधिकारी जुहैर बिन सगीर, वरिष्ठ पुुलिस अधीक्षक नितिन तिवारी, महापौर विनोद अग्रवाल उपस्थित रहे। मंचन में कुंभकरण व मेघनाद का वध होता है। तत्पश्चात राम और रावण के बीच युद्ध प्रारंभ होता है।
राम के बाण से रावण का अंत होता है। मंचन मौजूद लोग एक-दूसरे को विजय पर्व की बधाई देते है। अतिथियों के द्वारा भगवान राम, लक्ष्मण माता सीता, हनुमानजी की आरती उतारी जाती है।