हजार - पांच सौ रुपये के पुराने नोट बंद होने का असर एक्सपोर्ट पर भी साफ तौर पर नजर आ रहा है। सप्लायर मौके पर फायदा उठा रहे हैं। निर्यातकों को कच्चा माल सप्लाई करने वाले सप्लायरों ने पुरानी करेंसी पर रॉ मैटेरियल कर रेट बढ़ाकर डेढ़ गुना तक कर दिया है।
सप्लायरों ने जिंक, पीतल की सिल्ली, एनोड समेत एक्सपोर्ट में इस्तेमाल होने वाले हरेक रॉ मैटेरियल का रेट बढ़ा दिया है। निर्यातकों को वक्त से आर्डर पूरे करने हैं लिहाजा बढ़ी दर पर भी रॉ मैटेरियल खरीदने को मजबूर हैं।
वहीं सप्लायरों ने खुला रेट घोषित कर दिया है कि सौ रुपये के नोट या फिर नई करेंसी पर रॉ मैटेरियल रेट टू रेट (पुरानी दर) मिलेगा जबकि हजार - पांच सौ के बंद हो चुके नोटों पर रॉ मैटेरियल खरीदना है तो कीमत डेढ़ गुना तक चुकानी होगी।
मुरादाबाद के पीतल के प्रोडक्ट बनाकर एक्सपोर्ट करने के लिए विश्व प्रसिद्ध था। लेकिन अब पीतल के साथ ही दूसरी धातुओं से बनने वाले सामानों ने पीतल को पीछे छोड़ दिया। ऐेसे में मुरादाबाद से सभी प्रकार की धातुओं से सामान बनाकर एक्सपोर्ट किए जा रहे हैं।
लेकिन नोट बंदी ने दस्तकारों से लेकर निर्यातकों तक की हालत खराब कर दी है। हजार और पांच सौ के नोट नहीं होेने से हर दिन करोड़ों रुपये का कारोबार लाखों में सिमट गया है। उसमें भी छोटे नोट नहीं मिलने से कच्चा माल भी मिलना मुश्किल है।
नतीजा ये कि नोटबंदी के 11वें दिन में ही धातुओं के दामों में जबरदस्त उछाला आया है। इतना ही नहीं छोटे नोटों में माल की कीमत वहीं है जबकि हजार और पुराने नोट से कीमत डेढ़ गुना तक है।
ईपीसीएच के सीओए सदस्य नवेद उर रहमान ने बताया कि नोट बंदी के बाद से सभी धातुओं के रेट में प्रति किलो बीस से पचास रुपये की महंगाई आई है। रेयर आब्जेक्ट इंडिया के अंशुल अग्रवाल ने बताया कि कच्चा माल नहीं मिलने से हर दिन का प्रोडक्शन गिर गया है।