रानी लक्ष्मी बाई का सामना करने वाले अंग्रेज कर्नल ह्यूज के शब्दों में 1858 के गदर से जुड़े सेनानियों में 'एक मात्र मर्द' झांसी की रानी की आज जयंती है। 19 नवंबर 1828 को उनका जन्म वाराणसी में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था। उनका जीवन भारतीय महिलाओं को हमेशा प्रेरित करता रहा है। उनके जीवन से जुड़ी घटनाएं उनके संघर्ष की गाथा को बयान करती हैं। उनके जीवन से ही जुड़ा एक दिलचस्प किस्सा हम यहां सुना रहें हैं जिससे आप समझ पाएंगे कि उनके दिल में देश के लिए किस हद तक प्यार था।
झांसी नरेश गंगाधर राव से इनका विवाह हुआ। गंगाधार राव की असमय मृत्यु हो गई थी। कंपनी के शासक लार्ड डलहौजी ने देशी शासकों का राज्य हड़पने का फार्मूला डाक्टरिन आफ लैप्स के रूप में ईजाद किया था। इसके तहत उन भारतीय शासकों के राज्य को कंपनी के राज्य में शामिल कर लिया जाता था जो निःसंतान थे। गंगाधर राव ने मृत्यु से पूर्व ही दामोदर नामके एक पुत्र को दत्तक यानी गोद लिया। चूंकि इंग्लिश लाॅ में गोद लिए पुत्र या पुत्री को संपत्ति का वारिस होने की कोई परंपरा नहीं थी इसलिए उन्होंने इसे वैध नहीं माना।
यहीं से शुरू हुआ अंग्रेजों और झांसी की रानी लक्ष्मीबाई का संघर्ष। उन्होंने इसके लिए अपने बचपन के मित्र नाना साहेब पेशवा और तात्या टोपे के साथ मिलकर अंग्रेजों को झांसी से खदेड़ने का बीड़ा उठाया। चूंकि उस समय भारत रियासतों में बंटा था लिहाजा कई रियासतें अंग्रेजों को अपने राज्य से भगाने में लगी हुईं थीं। दिल्ली के आखिरी मुगल बादशाह बहादुरशाह जफर की सदारत में आजादी की लड़ाई का बिगुल फूंका गया था।