कभी रामपुर के हुक्मरां रहे नवाबों के यूरोपियन कलाकारों के हाथों बने विशाल चित्रों को अब या तो दीमक चाट रहे हैं या फिर देखभाल के अभाव में इनकी चमक खत्म हो गई है। ब्रिटिश काल में रामपुर रियासत की शानो शौकत का केंद्र रहे खासबाग पैलेस की दीवारों पर लगी शासकों की पेंटिंग्स अपनी दुर्दशा की कहानी खुद बयां कर रही हैं।
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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद रामपुर के अंतिम शासक नवाब रजा अली खां की संपत्ति के बंटवारे की प्रक्रिया मुस्लिम पर्सनल लॉ के आधार पर जिला न्यायालय में चल रही है। कोर्ट द्वारा नियुक्त एडवोकेट कमिश्नरों द्वारा संपत्ति का मूल्यांकन किए जाने के दौरान नवाब खानदान से जुड़ी बहुत सी बातें सार्वजनिक हुई हैं।
इन्हीं में महल के अंदर लगी नवाबों की पेंटिंग्स की बदहाली का मामला भी शामिल है। खासबाग पैलेस की दीवारों पर सात शासकों की पेंटिंग्स लगी हैं। यह ऑइल पेंटिंग्स कैनवास पर बनी हैं। इन्हें अलग-अलग विदेशी आर्टिस्टों ने बनाया है। सभी पेंटिंग्स बेहद खूबसूरत और भव्य हैं।
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बताते हैं कि इन्हें जिस फ्रेम में लगाया गया है उस पर सोने का पॉलिश किया गया था। इतना ही नहीं, सभी फ्रेम रामपुर रियासत के लोगों से सुसज्जित हैं, लेकिन देखभाल के अभाव में इन पेंटिंग्स की चमक फीकी पड़ गई है। कुछ को दीमक ने चाट लिया है और कुछ को बरसात के पानी और सीलन ने क्षतिग्रस्त कर दिया है। कुछ फट गई हैं। 100 साल से भी ज्यादा पुरानी इन पेंटिंग्स पर नवाबों के नाम की पट्टिकाएं भी लगी हैं।
रामपुर रियासत में दस नवाबों ने राज किया था, लेकिन खासबाग पैलेस में सात नवाबों की पेंटिंग्स ही मौजूद हैं। इन दस शासकों की पेंटिंग्स का जिक्र नवाब रजा अली खां की संपत्ति की सूची में भी है। जो पेंटिंग्स मौजूद हैं अगर उन के रखरखाव पर ध्यान नहीं दिया गया तो यह भी जल्दी ही नष्ट हो जाएंगी।
रामपुर में 173 साल रही है नवाबों की हुकूमत
नवाबों की बदहाल पेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
पहले शासक नवाब फैजउल्ला खां से लेकर अंतिम शासक नवाब रजा अली खां तक रामपुर में 173 साल नवाबों की हुकूमत रही है। इनके अलावा नवाब मोहम्मद अली खां, नवाब गुलाम मोहम्मद खां, नवाब अहमद अली खां, नवाब मोहम्मद सईद खां, नवाब यूसुफ अली खां, नवाब कल्बे अली खां, नवाब मोहम्मद मुश्ताक अली खां और नवाब हामिद अली खां हुक्मरां रहे हैं। एक जुलाई 1949 को नवाब रजा अली खां ने इस रियासत का विलय भारतीय गणराज्य में कर दिया था। स्वतंत्रता के बाद भारतीय गणराज्य में विलय होने वाली रामपुर सबसे पहली रियासत थी।
1967 से नहीं हुई देखभाल, तीन पेंटिंग बेंच दीं : नवाब काजिम अली खां
अंतिम शासक नवाब रजा अली खां के पौत्र पूर्व मंत्री नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां का कहना है कि 1967 से रामपुर रियासत की शान रही तमाम धरोहरों की कोई देखभाल नहीं की गई। ऑइल ऑन कैनवस पेंटिंग्स की खराब हालत इसका सबूत है।
कुछ माह पहले अपने पूर्वजों की इन पेंटिंग्स की बदहाली देखकर मुझे अफसोस हुआ, क्योंकि यह पेंटिंग्स विदेशी आर्टिस्ट्स को रामपुर बुलाकर बनवाई गई थीं। नवाब मोहम्मद अली खां, नवाब मोहम्मद सईद खां और नवाब यूसुफ अली खां की पेंटिंग्स खसबाग से गायब हैं, जो बेच दी गई हैं। यह शर्म की बात है कि रामपुर रियासत के बेशकीमती सरमाये को एक पक्ष ने खुर्दबुर्द और बर्बाद करने में कोई कसर नहीं छोड़ी है।
रजा लाइब्रेरी को सौंपकर पेंटिंग्स का हो संरक्षण: काशिफ
नवाबों की बदहाल पेंटिंग
- फोटो : अमर उजाला
इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) रुहेलखंड चैप्टर के सह संयोजक काशिफ खां ने रामपुर रियासत के शासकों की इन पेंटिंग्स को बहुमूल्य धरोहर बताया है। उनका कहना है कि इन पेंटिंग्स का उचित रखरखाव न कर अपराध किया गया है, क्योंकि यह पूरे रामपुर की धरोहर है और इसे नष्ट नहीं किया जाना चाहिए।
दुर्भाग्य से खासबाग ऐसे लोगों के कब्जे में रहा जिन्हें न तो रामपुर से और न ही अपने पूर्वजों के इन चित्रों से कोई लगाव है। जितनी भी ऑइल ऑन कैनवस पेंटिंग्स पैलेस में मौजूद हैं उन्हें रजा लाइब्रेरी में स्थित संरक्षणशाला को सौंप दिया जाना चाहिए ताकि उनका संरक्षण हो सके।