पुलिस कस्टडी में जिला जेल से बिजनौर ले जाए गए मूंढापांडे थाने के बर्खास्त एसओ सैय्यद मंसूर आबिद को रास्ते में होटल में ऐश कराने का मामला सामने आया है। मंसूर आबिद के साथ बंदी वाहन में मौजूद रहे बाकी चार कैदियों ने यह सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
भड़के कैदियों ने इसके रिएक्शन में जिला जेल गेट बंदी वाहन से उतरते ही एक दरोगा की पिटाई कर दी। कैदियों का आरोप है कि इसी दरोगा ने बिजनौर से लौटते वक्त बंदी वाहन को एक होटल पर रुकवाकर बर्खास्त एसओ की मुलाकात एक लड़की से कराई।
कैदियों ने पुलिस वालों पर होटल में शराब पीने के आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें मांगने पर पानी तक नहीं दिया गया। सर्राफ सत्येंद्र हत्याकांड में पिछले 21 महीने से जिला जेल में बंद मूंढापांडे थाने के बर्खास्त एसओ सैय्यद मंसूर आबिद को हालांकि सत्येंद्र प्रकरण में हाईकोर्ट से जमानत मिल चुकी है।
लेकिन किसी दूसरे मामले में पुलिस उसे व चार अन्य बंदियों को जिला जेल से बंदी वाहन में कोर्ट पेशी के लिए बिजनौर लेकर गई थी। लेकिन बंदी वाहन में मौजूद रहे कांठ के गांव हरि नूरपुर के प्रधान पति जाकिर उर्फ गुड्डू,फरीद चमन्नी और देवेंद्र समेत बाकी चार कैदियों का आरोप है कि बिजनौर पेशी से लौटते समय पूर्व एसओ को रास्ते में स्पेशल ट्रीटमेंट दिया गया।
कैदियों का आरोप है कि रास्ते में ऊमरी के पास एक होटल पर पुलिस ने बंदी वाहन रोककर दरोगा को एक होटल में वीआईपी ट्रीटमेंट दिया। पुलिस वालों ने भी बर्खास्त दरोगा के साथ खाना खाया और फिर यहीं उसकी एक लड़की से मुलाकात भी कराई। कैदियों का आरोप है कि इस दौरान पुलिस वाले बाहर ड्यूटी बजाते रहे।
कैदियों का दावा है कि करीब दो घंटा तक मंसूर आबिद होटल में रहा। जबकि बंदी वाहन में बंद बाकी बंदी पानी की एक एक बूंद के लिए तरसते रहेे। बंदियों का आरोप है कि जब उन्होंने पानी मांगा तो उन्हें गालियां दी गईं।
बुधवार को रात करीब पौने सात बजे जब यह बंदी वाहन जिला जेल पहुंचा तो बंदियों ने हंगामा शुरू कर दिया। वाहन का दरवाजा खुलते ही उससे उतरे कैदी जाकिर उर्फ गुड्डू व उसके साथियों ने बंदी वाहन पर तैनात रहे दरोगा अफसार अहमद के साथ मारपीट शुरू कर दी।
कैदियों ने दरोगा को पीटने के साथ ही चीख - चीखकर उसके कारनामों को भी बयां किसी। जेल गेट पर कैदियों द्वारा दरोगा की पिटाई से वहां हड़कंप मच गया। बाकी पुलिस कर्मियों और बंदी रक्षकों ने किसी तरह दरोगा को बचाया।