मुरादाबाद। गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के स्नातक व परास्नातक प्रथम सेमेस्टर के परिणाम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों के फेल होने के बाद कॉलेज प्रबंधकों और प्राचार्यों में जबरदस्त रोष है। उन्होंने कुलपति पर मनमानी का आरोप लगाया। कहा कि पहले प्रवेश और अब परिणाम में जो हालात हैं, उसमें कॉलेज संचालित करना चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में उन्होंने मान्यता वापस करने या एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबंध करने की मांग की है। उन्होंने राज्यपाल और मुख्यमंत्री को भी शिकायती पत्र भेजा है।
एसोसिएशन ऑफ सेल्फ फाइनेंस्ड एजुकेशनल इंस्टीट्यूट गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय के अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि विवि से संबद्ध 34 विधि महाविद्यालयाें का परिणाम सिर्फ 2.5 फीसदी है। मेरे तेजू सिंह मेमोरियल लॉ कॉलेज गजरौला में अध्ययनरत सभी 120 विद्यार्थी फेल हैं। अन्य सभी कॉलेजों की भी यही स्थिति है। इसलिए हमारी मांग है कि हम अपनी मान्यता वापस लेना चाहेंगे। ऐसे में या तो हमारे कॉलेज बंद कर दिए जाएं या फिर एमजेपी रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध कर दें। इसी बार एमजेपी रुहेलखंड विवि का परिणाम 80 फीसदी है। गुरु जंभेश्वर से संबद्ध अन्य पाठ्यक्रमों के डिग्री कॉलेजों का परिणाम भी बहुत खराब है। इस दौरान अशोक यादव, डॉ. राना परवीन, मोहम्मद अकरम, एमएम मेंहदी, राजदीप गोस्वामी, प्रिंस शर्मा, विशाल राजपूत, होशियार सिंह, डॉ. एम अजहर खान, राम प्रताप यादव, सुनील कुमार, डॉ. अनुराग यादव आदि मौजूद रहे।
दाखिले के समय भी किया था परेशान
अध्यक्ष अशोक चौधरी का कहना है कि एलएलबी में प्रवेश के समय भी कुलपति ने परेशान किया था। पूरे उत्तर प्रदेश के किसी भी विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए प्रवेश परीक्षा नहीं होती लेकिन कुलपति गुरु जंभेश्वर विश्वविद्यालय ने प्रवेश परीक्षा करवाई। विवि ने विद्यार्थियों से प्रवेश परीक्षा शुल्क 15 सौ रुपये लिए। विवि से स्वीकृत 5690 सीटों के सापेक्ष 2630 विद्यार्थियों ने प्रवेश परीक्षा दी। इसमें से दो हजार ने दाखिला लिया। चार हजार सीटें खाली रह गईं। इस पर जब राज्यपाल से मुलाकात की तो उन्होंने पत्र जारी किए। इन पत्रों को भी कुलपति मानने को तैयार नहीं थे। बाद में राज्यपाल से मिले सख्त निर्देशों को माना गया और तब दाखिला हुए। इसके लिए विद्यार्थियों से 16 सौ रुपये लिए गए। जबकि हमारे मातृ विश्वविद्यालय एमजेपी रुहेलखंड विवि में पंजीकरण शुल्क सिर्फ 150 रुपये है। यहां पर प्रवेश परीक्षा भी नहीं हुई थी। सरकार ने छात्रहित में राज्य विवि की स्थापना की, लेकिन इस विवि को स्थापित करने का कोई फायदा नहीं हुआ बल्कि कुलपति इस विवि को बंद करने पर तुले हुए हैं।
यह भी लगाए आरोप :-
- 12 नवंबर 2025 को कुलाधिपति के विशेष कार्यधिकारी द्वारा पत्र जारी कर मदर संस्था एमजेपी रुहेलखंड विवि के अनुसार प्रवेश के लिए आदेशित किया गया। इसी से चिड़कर कुलपति ने सभी विद्यार्थियों के साथ खिलवाड़ किया है।
- विवि में मुख्य परीक्षक जैसी कोई व्यवस्था नहीं है। जिन दो शिक्षकाें को मुख्य परीक्षक बनाया गया, उन्होंने 2005 के बाद से कोई मूल्यांकन नहीं किया है। जबकि दोनों परीक्षक सभी कॉलेजों में प्रैक्टिकल में जाते हैं।
- कुलपति द्वारा मूल्यांकन के समय शिक्षकों को डरा धमका कर कापी चेक करवाई गईं हैं। इसकी शिकायत कुछ शिक्षकों ने की है।
- सभी फेल विद्यार्थियों को ग्रेस नंबर देकर अगले सेमेस्टर में राजू भैय्या राज्य विवि के अनुसार प्रोन्नत किया जाए।
- अगले सेमेस्टर में सभी विद्यार्थियों की कापी ठीक से चेक कराकर पास किए जाए और मुख्य परीक्षक की असंवैधानिक नियुक्ति बंद की जाए।