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प्राथमिक विद्यालयों पर कब्जा! विभाग बन रहा अंजान

Thu, 04 May 2017 01:59 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला/मुरादाबाद
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स्कूल - फोटो : amarujala
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जब आप प्र्राथमिक विद्यालय मकबरा को बाहर से देखेंगे को कहेंगे कि वाह क्या शानदार तीन मंजिला प्राथमिक विद्यालय है। लेकिन आपको जानकर हैरानी होगी कि सिर्फ नीचे वाला भवन ही स्कूल का है। ऊपर के दो मंजिलों पर किसी व्यक्ति का पूरा परिवार रहता है। जबकि यह भवन शिक्षा विभाग का है।
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मकबरा प्राथमिक विद्यालय बाहर से देखने में शानदार तीन मंजिला भवन है। ग्राउंड फ्लोर के भवन पर लिखे ‘प्राथमिक विद्यालय मकबरा बालक’ को पढ़कर आप जरूर जानना चाहेंगे कि शहर भर में जहां प्राथमिक स्कूलों में भवन की कमी है वहां तीन मंजिला स्कूल कैसे बन गया।

स्कूल के ऊपर बने दो मंजिला भवन की जानकारी बेसिक शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारी बीएसए को भी नहीं है। शिक्षा विभाग से जुड़े जानकारों ने बताया कि 1972 से पहले सभी स्कूल नगर निगम के अंडर में थे। लेकिन सन 72 के बाद स्कूलों को बेसिक शिक्षा परिषद को सौंप दिया गया।
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इस स्कूल को भी परिषद को सौंपा गया लेकिन उसकी छत को निगम ने पहले ही किसी व्यक्ति को लीज पर दे दिया था। उस व्यक्ति ने उस पर मकान बना लिया। लेकिन करीब तीन साल पहले उक्त व्यक्ति ने उसी मकान पर एक और मंजिल बना डाला।

इसे लेकर स्कूल के प्रधानाचार्य और मोहल्ले के लोगों ने शिकायत भी की थी लेकिन निगम वालों ने कोई कार्यवाही नहीं की। अब यह प्राथमिक विद्यालय तीन मंजिला हो गया है। हकीकत में हुआ क्या और व्यक्ति ने स्कूल की छप पर कैसे दो मंजिला मकान बना लिया इस संबंध में विभाग के किसी अधिकारी के पास इसका जवाब नहीं है।

मकबरा स्कूल में दो शिफ्टों में स्कूल चलता है। पहले शिफ्ट में प्राथमिक विद्यालय मकबरा बालक और शाम की शिफ्ट में मकबरा कन्या की कक्षाएं चलती हैं।
  कंपनी बाग स्थित प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क में दबंगों का कब्जा, विभाग खामोश कंपनी बाग स्थित प्राथमिक विद्यालय गांधी पार्क में पच्चीस से अधिक सालों से एक परिवार ने कब्जा किया हुआ है। कुछ साल पहले उसने अपने एक और रिश्तेदार को बुलवाकर एक और कमरा बनवा दिया है।

लेकिन विभाग स्कूल को कब्जा मुक्त कराने को लेकर कोई पहल नहीं कर रहा है। यहां जिस परिसर में स्कूल चल रहा है उसी परिसर में बने दो पुराने कमरों में एक परिवार लंबे समय से रहा रहा है।

जब एक बार विभाग के एक कर्मचारी ने उक्त परिवार से पूछा कि वह स्कूल के कमरों में कैसे और किस हक से रह रहे हैं तो परिवार के लोगों ने बताया कि तीस-पैंतीस साल पहले उनके पिता इसी स्कूल में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी थे। तभी से वह लोग यहां रह रहे हैं।

जबकि नियमानुसार किसी भी कर्मचारी को स्कूल का कमरा रहने के लिए नहीं दिया जा सकता। कुछ साल पहले इसी परिवार ने अपने एक और रिश्तेदार को बुलाकर चुपके से एक और कमरे का निर्माण करा लिया। स्कूल पर कब्जा पच्चीस-तीस साल पुराना है इसलिए किसी अधिकारी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।

वर्जन: इस संबंध में मुझे जानकारी नहीं है। स्कूलों में कब्जे को लेकर स्कूल स्टाफ से जानकारी मांगी जाएगी। अगर स्कूल पर अवैध रूप से कब्जा हुआ है तो सख्त कार्यवाही की जाएगी। - संजय सिंह, बीएसए 
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