पांच साल से बारिश के मौसम में भोलानाथ की मिलक में लोग नारकीय जिंदगी भुगतते आ रहे हैं। दहलीज तक भरने वाले गंदे पानी की अनचाही कैद लोगों का दम घोंटती है। यहां स्थिति में सुधार नहीं होते देख लोग अपनी जगह बेचने को मजबूर हैं। लोगों ने अपने मकानों की दीवारों पर ‘बिकाऊ है’ लिख दिया है।
बारिश के पानी के बीच नाव पर अंदर जाने पर कई मकान और दीवारों पर - बिकाऊ हैं.. लिखा हुआ है। लोगों ने बताया कि लोग यहां अपनी संपत्तियां बेचना चाहते हैं, लेकिन हालात ऐसे हैं कि खरीदार नहीं आते। अब बारिश का पानी भरने के बाद दर्जनों घरों के दरवाजे पर ताले पड़े मिले। गंदे पानी और बीमारियों के डर से लोग रिश्तेदारों के घरों पर शिफ्ट हो चुके हैं। यहां बचे हुए परिवारों को चोरी और लूट का डर सता रहा है। इसलिए वह घर छोड़कर नहीं गए। लोगों को सरकारी मदद की उम्मीद है।
ताजा सब्जी, फल को तरसे लोग
बारिश का पानी भरने के बाद भोलानाथ की मिलक के दर्जनों मकानों का संपर्क बाकी शहर से कट गया है। ताजा सब्जी, फल और अनाज के लिए उन्हें मशक्कत करनी पड़ रही है। सोमवार को गलियों में भी चूल्हे जलते मिले। कुछ ऊंचे प्लाटों पर भी महिलाएं खाना पका रहीं थीं। चूल्हे के लिए सूखी लकड़ी भी उन्हें नहीं मिल रही है।
घरों तक पहुंच रहे सांप, बिच्छू
यहां रहने वाली शीतल रस्तोगी के मुताबिक बारिश का पानी भरने के बाद सांप और बिच्छू घरों तक पहुंचते हैं। बिलों में पानी भरने के बाद सांप-बिच्छू भी सूखी जगह की तलाश में घरों के अंदर तक आते हैं।