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Moradabad News: एमडीए कार्यालय के चक्कर लगा रहे लोग, नहीं हो रही सुनवाई

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मुरादाबाद। एमडीए कार्यालय में हर रोज कई लोग अपनी फरियाद लेकर आते हैं लेकिन समस्याओं का निराकरण नहीं हो पाता है। कभी अधिकारी नहीं होते तो कभी शिकायतों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पाती है। सोमवार को भी कांशीराम नगर ब्लाक एफ के कई लोग यहां पहुंचे। घंटों इंतजार के बाद उपाध्यक्ष से मिलकर अपनी कॉलोनी में ही अनाधिकृत रूप से प्लाॅटिंग के लिए गेट बनाए जाने की शिकायत रखी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल पाया।
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- विवेक वर्मा ने बताया कि इससे पहले भी वीसी से मिले थे तो उन्होंने निर्माण को ध्वस्त करने के निर्देश दिए थे लेकिन जब आदेश का पालन नहीं किया गया तो आज दोबारा मिलने आए लेकिन आज भी उन्हें कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिल सका है। इसकी शिकायत पुलिस से करने को कहा तो उन्होंने मझोला थाना पहुंचकर पुलिस को भी शिकायतीपत्र दिया है।
- डिडौली के विजय सिंह ने बताया कि डिडौली में एमडीए ने बड़े क्षेत्र को अपनी कॉलोनी के लिए अधिकार में ले लिया है, इसलिए वहां के लोग न तो कोई निर्माण कर सकते हैं और न ही किसी अन्य को बेच सकते है। यहां कुछ लोगों ने पहले तो काफी महंगी जमीन खरीदी थी लेकिन अब एमडीए को आधी से कम कीमत पर बेचना मजबूरी बन गया है। उनके साथी महबूब को अपनी जमीन बेचनी है, अधिकारियों से मिलकर कहा तो उन्होंने अभिलेख लेकर आने को कहा है।
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- लवी सक्सेना भी अपनी एक समस्या को लेकर एमडीए कार्यालय पहुंची थीं, उनका कहना है कि दो साल पहले एमडीए ने उनके भवन पर सील लगा दी थी, अब कोर्ट ने आदेश ने एमडीए को दो माह में मामला निस्तारित करने को कहा था, जो समय पूरा हो गया है लेकिन एमडीए अभी भी सील को नहीं खोल रहा है।
- आजाद नगर निवासी जाबिर हुसैन पाशा ने बताया कि 2014 में स्कूल की जमीन आवंटित कराई थी, 2017 में वन टाइम सटलमेंट स्कीम (ओटीएस) में एमडीए ने उन्हें 40.36 लाख का नोटिस दिया, पहले महीने में 20 लाख रुपये दे दिए लेकिन इसी बीच ओटीएस को गलत बताकर एमडीए ने दोबारा से 2023 में 82 लाख रुपये का नोटिस जारी कर दिया। इसके लिए समय मांगा तो एमडीए ने उसका आवंटन निरस्त कर भूमि को किसी अन्य को आवंटित कर दिया। अब जमा कराए गए 38 लाख रुपये वापस नहीं दिए जा रहे हैं, जिसके लिए चक्कर काटने को मजबूर हैं। कोई संतोषजनक जवाब ही नहीं दे रहा है।
- हिमगिरि कॉलोनी निवासी कृष्ण औतार गुप्ता ने बताया कि 10 साल पहले फ्लैट लिया था, जिसका भुगतान भी कर दिया था लेकिन एमडीए ने अब तक उसका बैनामा नहीं कराया है, जिसके कारण सालों से चक्कर काट रहे हैं लेकिन अधिकारी लगातार टालमटोल कर रहे हैं।
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- एमडीए कार्यालय में सुबह 10 से 12 बजे तक सभी अधिकारी शिकायतें सुनते हैं। ई-डाक सिस्टम भी हैं। पोर्टल पर शिकायतें अपलोड करके उनका निस्तारण होता है। अधिकारियों से मिलकर जो लोग शिकायतें करते हैं, उनका भी त्वरित निस्तारण होता है।
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- पारुल तरार, विशेष कार्य अधिकारी, एमडीए
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