संभल हिंसा के दौरान एक युवक को गोली लगने के मामले में तत्कालीन सीओ समेत 12 पुलिसकर्मियों पर एफआईआर दर्ज करने के सीजेएम कोर्ट के आदेश को संभल से सपा सांसद जियाउर्रहमान बर्क ने ऐतिहासिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि यह फैसला साफ संदेश देता है कि कानून से ऊपर न तो वर्दी है और न ही कोई ओहदा।
सांसद ने कहा कि अधिकारी हो या आम नागरिक, कानून तोड़ने वाला बच नहीं सकता। संभल हिंसा के दौरान जिन अधिकारियों ने कानून की सीमा लांघी और अपने अधिकारों का दुरुपयोग किया उनके खिलाफ न्यायपालिका के जरिए इंसाफ जरूर मिलेगा। उन्होंने कहा कि यह आदेश उन लोगों के लिए भी उम्मीद है जो लंबे समय से न्याय की प्रतीक्षा कर रहे थे।
बर्क ने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ नहीं बल्कि अन्याय और जुल्म के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र में जवाबदेही सबसे बड़ी कसौटी है और अगर किसी ने कानून तोड़ा है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि इंसाफ भले देर से मिले लेकिन मिलता जरूर है। न्यायपालिका के इस फैसले से पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद मिली है। सांसद ने भरोसा जताया कि आगे भी सच और हक की लड़ाई जारी रहेगी।