मुरादाबाद। ईद का चांद देखने के बाद ही फितरा अनिवार्य हो जाता है। इसे जल्द से जल्द निकाल लेना चाहिए। यह घर के हर सदस्य के लिए अनिवार्य होता है। फितरा में इन्सान तीन किलो गेहूं या तीन किलो चावल (जो भी ज्यादा इस्तेमाल करता हो) की राशि घर के प्रत्येक सदस्य के लिए निकालनी होगी। इस राशि को गरीबों तक पहुंचाना ईद की नमाज अदा करने से पहले बेहद जरूरी है। बेहतर है कि ईद का चांद देखने के बाद ही फितरा निकालकर उस राशि को गरीबों तक पहुंचा दें, जिससे गरीब भी ईद मना सके। यह बातें किसरौल स्थित कुल्लू खां का इमामबाड़ा में खुतबे के दौरान इमामे जुमा मौलाना शहवार हुसैन ने कही।
इमामे जुमा ने अपने खुतबे के दौरान कहा कि रमजान अल्लाह का महीना है। इस महीने में बंदा अल्लाह का मेहमान होता है। इस पूरे महीने में इबादत करने का सवाब सबसे अधिक है। साथ ही अल्लाह ने इस महीने की इबादत के इनाम के रूप में ईद का दिन रखा है। ईद वह दिन होता है, जिस दिन कोई इन्सान गुनाह न करे। ईद पर फितरा निकालकर गरीबों तक उस राशि का पहुंचाना अनिवार्य है।
मौलाना ने अपनी तकरीर में कहा कि हर पैसे वालों के लिए जरूरी है कि वह फितरा निकालें। घर के प्रत्येक सदस्य के अलावा अगर कोई मेहमान है तो उसका भी फितरा निकालना होगा। इस रकम से गरीबों को खुशी मिलती है और वह ईद मना पाते हैं। इसका सवाब बेहद अधिक है। सभी को मिलजुलकर ईद का त्योहार मनाना चाहिए। इस दिन सिर्फ गले ही नहीं बल्कि दिल भी मिलने चाहिए। लोगों को दुश्मनी, नफरत आदि का भी त्याग करना चाहिए। ब्यूरो