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दशकों बाद मिले और एक-दूसरे के गले लगकर पुरानी यादों में खोए

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मुरादाबाद के पारकर इंटर कालेज में स्‍थापना दिवस पर केक काटने के दौरान डांस करते पूर्व छात्र। संव?
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मुरादाबाद। पारकर इंटर कालेज के 150वें स्थापना दिवस के दूसरे दिन शनिवार को भी कालेज में पूर्व छात्र जुटे। कालेज से पास आउट होकर अलग-अलग क्षेत्र में नाम रोशन करने वाले पूर्व छात्र दशकों के बाद मिले तो पुरानी यादों में खोकर भावुक हो उठे। एक-दूसरे को गले लगाकर किसी ने बचपन की शरारतों को याद किया तो कोई मेडल लेकर स्कूल पहुंचा। पूर्व छात्रों ने अध्ययनरत छात्रों को कालेज के गौरवशाली इतिहास से रूबरू कराया।
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1974 बैच के छात्र एवं एयरपोर्ट अथॉरिटी आफ इंडिया के डायरेक्टर डा. दिवाकर गोयल ने कहा कि सफल इंसान बनने के लिए शिक्षकों का आदर और स्कूल के प्रति समर्पण जरूरी है। 1976 बैच के संजीव श्रीवास्तव ने बच्चों को पर्यावरण संरक्षण के लिए प्लास्टिक के बहिष्कार का आह्वान किया। योग गुरु दीपक लाहोरी ने छात्रों को ध्यान के बारे में बताया। वरिष्ठ पत्रकार विनीत नारायण ने कहा कि प्रथम श्रेणी से पास होना ही काफी नहीं होता है। सफलता के लिए जुनून जरूरी है। 1950 बैच के छात्र डा. आरपी शर्मा ने कहा कि उनकी उपलब्धियां पारकर कालेज की धरोहर हैं। राजेश खन्ना ने कहा कि विद्यालय ने ही उन्हें काबिल बनाया।
प्रधानाचार्य एसके नेथन ने पूर्व छात्रों एवं अतिथियों का स्वागत किया। सबसे सीनियर पूर्व छात्र प्रो आरके शर्मा ने 150 वर्ष पूरे होने पर केक काटा। कार्यक्रम समिति के डा. राजीव श्रीवास्तव और अजय शाह ने आभार जताया। राजेश खन्ना ने प्रधानाचार्य एसके नेथन को विद्यालय के लिए जनरेटर भेंट किया। डा. राजीव श्रीवास्तव की ओर से तीन वाटर फील्टर सौंपे गए।
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अलग-अलग फील्ड में नाम रोशन करने वाले कालेज से पास आउट छात्र
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- आरके शर्मा, एसआर इंटरनेशनल के डायरेक्टर
- मोहन भंडारी, ले जरनल
- अभय जोशी, ले जरनल
- विपिन जैन, टीएमयू के निदेशक
- अमिताभ भारद्वाज, चिकित्सक
- डा. उमेश मित्रा, चिकित्सक
- संजय रस्तौगी, रेलवे डायरेक्टर बोर्ड
- प्रभदास माथुर, आईएएस
- राजीव यादव, आईएएस
- प्रकाश गर्ग, यूएस में मल्टीनेशनल कंपनी में उच्चाधिकारी
- विनीत जैन, चिकित्सक एम्स
- अमित अग्रवाल, चिकित्सक
- राजीव श्रीवास्तव, चिकित्सक
- अजय कक्कड़, चिकित्सक
- अनिल साहनी, चिकित्सक
- उमेश मेहता, एडीजी, दिल्ली पुलिस
- प्रोफेसर आरके शर्मा, बरेली कालेज से सेवानिवृत्त
पूर्व छात्रों से साझा किए अनुभव
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- 1988 में पारकर कालेज से पास आउट हुआ। उस वक्त जिंदगी काफी मुश्किलों से गुजर रही थी। कालेज ने संभाला और शिक्षकों ने हौसला बढ़ाया। कालेज की पढ़ाई और अनुशासन से जिंदगी को दिशा मिली। एनसीसी ने आत्मविश्वास बढ़ाया। - पवन सिन्हा, ज्योतिष गुरु
- कालेज में कड़ा अनुशासन था। पढ़ाई इससे भी अच्छी थी। कमजोर बच्चों को अतिरिक्त क्लास दी जाती थी। आठवीं के बाद ही बच्चों की काउंसलिंग होती थी। इससे बच्चों को विषय चुनने में मदद मिलती थी। - डा. दीवाकर गोयल, एचआर एयरपोर्ट आथोरिटी
- मैं मेधावी छात्र नहीं था, लेकिन पढ़ाई का जुनून था। अनुशासित रहा। कालेज में शिक्षकों के मार्गदर्शन से अपने लक्ष्य को पूरा करने के लिए दिशा मिली। शिक्षकों का मार्गदर्शन से ही जिंदगी से सफल हुआ। - विनीत नारायण, बृज फाउंडेशन के संस्थापक
- कालेज की खूब शरारत करते थे। पढ़ाई में सभी अव्वल थे। लेकिन शरारत के चलते पूरी क्लास की पिटाई होती थी। प्रधानाचार्य कक्ष के आगे से निकलने की हिम्मत नहीं होती थी। कदम खुद ही रुक जाते थे। - सुनील कुमार, उपाध्यक्ष एलएनटी कंस्ट्रक्शन
- बच्चों के लिए डर जरूरी है। डर ही अनुशासित करता है। उस वक्त शिक्षकों के बच्चों को पिटने पर अभिभावक पढ़ाई पर जोर देते थे, लेकिन आज शिक्षकों के डांटने भर से अभिभावक शिकायत दर्ज कराते हैं। - आशीष कुमार ब्रिगेडियर
- पारकर कालेज में पढ़ना सपना होता था। 1977 का बैच सबसे अच्छा रहा। 39 बच्चे फर्स्ट डिवीजन पास हुए। इनमें 20 से अधिक बच्चों ने इंजीनियरिंग और एमबीबीएस का फील्ड चुना। अजय स्वरूप, कैप्टन
रूहेलखंड का पहला हाईस्कूल है पारकर कालेज
पारकर इंटर कालेज रूहेलखंड का पहला हाईस्कूल है। स्कूल का गौरवशाली इतिहास रहा है। पारकर कालेज में पढ़ाई करना सपना होता था। स्कूल से पढ़ने वाले कई पूर्व छात्र आज देश और विदेशों में सेवाएं दे रहे हैं। 1875 में पहला हाईस्कूल था, तब इसका नाम मुरादाबाद स्कूल था। टाउन हॉल के सामने चर्च के भवन में इसका संचालन होता था। 1901 में स्कूल का नाम डा. एडविन पारकर के नाम से पड़ गया। अमेरिकी दंपति लुईस और डा. एडविन पारकर 1859 में बोस्टन से बिजनौर आए। लुईस को मदर कहा जाता था और उन्होंने बिजनौर, मुरादाबाद और हरदोई में गर्ल्स स्कूल खोले। 1917 में नए भवन की नींव पड़ी और 1919 में बनकर तैयार हुआ।
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