ठाकुरद्वारा। आजाद समाज पार्टी के प्रदेश सचिव अधिवक्ता राजकुमार यादव की पत्नी पूनम यादव की बृहस्पतिवार रात संदिग्ध परिस्थिति में हुई मौत के बाद मृतका के मायके पक्ष के लोगों ने पोस्टमार्टम के बाद शव कोतवाली परिसर में रख कर प्रदर्शन किया। वह लोग अधिवक्ता पर पूनम यादव की हत्या का आरोप लगाते हुए मुकदमा दर्ज करने की मांग कर रहे थे। काफी हंगामे के बाद मृतका के भाई की तहरीर पर पुलिस ने अधिवक्ता और उसकी महिला मित्र के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
नगर में मंडी समिति के पास निवासी राजकुमार यादव की पत्नी पूनम यादव की बृहस्पतिवार रात संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई थी। राजकुमार यादव अपनी पत्नी के शव को लेकर नगर के सरकारी अस्पताल में पहुंचे थे, वहां से पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था। शुक्रवार को पोस्टमार्टम के बाद मृतका के शव को लेकर उसके भाई सुधीर कुमार, पिता विजयपाल सिंह आदि कई अन्य ग्रामीणों के साथ दोपहर बाद कोतवाली पहुंचे। उन्होंने शव को कोतवाली परिसर में रख कर अधिवक्ता राजकुमार और उसकी महिला मित्र पूजा चौहान के खिलाफ हत्या की रिपोर्ट दर्ज करने की मांग करने लगे। वहां मौजूद प्रभारी निरीक्षक विवेक शर्मा ने उन्हें बताया कि पीएम रिपोर्ट में हैंगिंग आने के कारण पूनम यादव के आत्महत्या करने की पुष्टि हुई है। लिहाजा वह हत्या की रिपोर्ट दर्ज नहीं कर सकते, लेकिन मायके पक्ष के लोग इससे संतुष्ट नहीं हुए। उनकी पुलिस से करीब दो घंटे तक नोक-झोंक चलती रही। प्रभारी निरीक्षक विवेक शर्मा ने बताया कि बाद में मृतका के भाई सुधीर की तहरीर पर पुलिस ने अधिवक्ता राजकुमार और उसकी महिला मित्र पूजा चौहान के खिलाफ पूनम यादव को आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। मामले की जांच की जा रही है।
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शव के अंतिम संस्कार को लेकर मृतका के बेटा-बेटी ननिहाल पक्ष के लोगों से भिड़े
ठाकुरद्वारा। मृतका के मायके वाले शव को भी अंतिम संस्कार के लिए भी अपने साथ ले जाना चाहते थे, लेकिन मृतका के बेटा-बेटी ने इसका विरोध किया। काफी देर हुई नोकझोंक के बाद पुलिस ने मृतका का शव उसके बच्चों को दिलवा दिया।
मृतका के शव को मायके वाले ही पोस्टमार्टम हाउस से थाना लेकर आए थे। वह मृतका के शव को अंतिम संस्कार के लिए अपने साथ ले जाना चाहते थे, लेकिन इसी बीच मृतका की पुत्री तनु और पुत्र तन्मय यादव ने अपने पिता पक्ष के लोगों के साथ वहां पहुंच कर इसका विरोध किया। दोनों ने कहा कि अपनी मां का अंतिम संस्कार करने का उन्हें अधिकार है। उन्होंने मायके पक्ष के लोगों से नाराजगी भी जताई। ननिहाल पक्ष के लोगों से नोकझोंक के बाद दोनों पक्षों में वार्ता हुई। लिखित सहमति के बाद पुलिस ने शव मृतका के बच्चों के हवाले कर दिया। इसके बाद दोनों बच्चे अपने परिजनों के साथ शव को अधिवक्ता के पैतृक गांव ईसापुर भूड़ लेकर ले गए। जहां गमगीन माहौल में उसका अंतिम संस्कार कर दिया गया।
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