मुरादाबाद। प्रशासकों के कार्यकाल में विकास कार्यों के नाम पर की हुई गड़बड़ी की जांच रिपोर्ट शासन को प्रेषित की जा चुकी है, लेकिन शासन स्तर से इस जांच रिपोर्ट पर अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। सूत्र बताते हैं कि शासन कार्रवाई करने से पहले जिलास्तरीय अधिकारियों द्वारा उन दस ग्राम पंचायतों की पूर्व में की गई जांच रिपोर्ट को देखना चाहता है जिसमें प्रशासकों ने 25 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्य कराए थे। ऐसी दस ग्राम पंचायतों की जांच के भी आदेश शासन ने दिए थे। निदेशक पंचायतीराज ने मुख्य विकास अधिकारी के माध्यम से यह रिपोर्ट मांगी है। इसके चलते उन अधिकारियों में हड़कंप है जिन्होंने इस मामले की पहले जांच की थी।
25 दिसबंर 2020 से 27 मई 2021 तक ग्राम पंचायत की बागडोर एडीओ (पंचायत) व ग्राम पंचायत सचिव के हाथों में रही। इस दौरान जिले की ग्राम पंचायतों में करीब 38 करोड़ रुपये के विकास कार्य आनन-फानन कराए गए। इसके चलते बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां भी सामने आईं। कहीं चहेती फर्म को बिना कार्य के भुगतान कर देने के मामला सामने आया तो कहीं बिना टेंडर प्रक्रिया को अपनाए एक ही फर्म से बाजार से कई गुना अधिक कीमत पर सामग्री क्रय कर ली गई। अमर उजाला ने मामले को उजागर किया तो पंचायतीराज मंत्री ने 25 लाख रुपये से अधिक के विकास कार्यों वाली ग्राम पंचायतों की जांच कराने के आदेश दिए थे। जिसके क्रम में अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार सिंह ने दो जुलाई 2021 को मुख्य विकास अधिकारी को पत्र लिखकर जिले की दस ग्राम पंचायतों की जिलास्तर पर टीम गठित कर जांच कराने के निर्देश दिए थे।
शासन से इस संबंध में संबंधित ग्राम पंचायतों की सूची भी सीडीओ को भेजी गई थी। शासन के आदेश के क्रम में सीडीओ ने कुछ एसडीएम व जिलास्तरीय अधिकारियों की अगुवाई में टीम गठित कर सूची में दिए गए ग्राम पंचायतों की जांच भी कराई, लेकिन जांच करने वाले अधिकारियों ने तब आनन-फानन जांच कर प्रशासकों को लगभग क्लीन चिट देते हुए गोलमोल रिपोर्ट सीडीओ को भेज दी थी। सीडीओ ने भी यह रिपोर्ट डीएम को भेज दी थी, लेकिन सूत्र बताते हैं कि यह रिपोर्ट शासन तक नहीं पहुंची थी। इधर मुख्यमंत्री के निर्देश पर शासन से गठित पांच सदस्यीय टीम ने जब जांच की तो ग्राम पंचायतों में प्रशासकों द्वारा कराए गए विकास कार्यों में भारी गड़बड़ियां मिलीं। जांच कर जाने के बाद टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंप भी चुकी है। सूत्र बताते हैं कि इस जांच के आधार पर प्रशासकों के खिलाफ कार्रवाई लगभग तय मानी जा रही है, लेकिन इसी बीच शासन को इसकी जानकारी हुई पूर्व में शासन के आदेश पर जिन दस ग्राम पंचायतों की जांच जिला स्तरीय अधिकारियों ने की है उसमें उन्होंने प्रशासकों को क्लीन चिट दे दी।
इधर कुछ प्रशासक भी अपनी गर्दन फंसती देख उस पुरानी जांच का हवाला देकर राहत के लिए कोर्ट तक का दरवाजा खटखटा चुके हैं। कमिश्नर इसे पहले ही गंभीरता से लेते हुए यह कह चुके हैं कि शासन स्तर की टीम की जांच में दोषी मिलने वाले प्रशासकों को अगर यहां के अधिकारियों ने क्लीन चिट देकर बचाने की कोशिश की होगी तो उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। सूत्र बताते हैं कि अब शासन भी इसे लेकर गंभीर हो गया है। शासन यह जानना चाहता है कि किस आधार पर जिला स्तरीय अधिकारियों ने 25 लाख रुपये से अधिक व्यय करने वाली दस ग्राम पंचायतों के प्रशासकों को क्लीन चिट दी गई। इसे जानने के लिए निदेशक पंचायतीराज ने सीडीओ आनंदवर्धन को पत्र भेजकर उस रिपोर्ट मांगी है। शासन का यह आदेश आने के बाद महकमे में हड़कंप है।
प्रशासकों के कार्यकाल के इन 10 ग्राम पंचायतों की पूर्व में जिलास्तरीय अधिकारी कर चुके जांच
ब्लाक ग्राम पंचायत विकास पर व्यय धनराशि
कुंदरकी सोनकपुर 69,85,623 रुपये
कुंदरकी रतनपुर कलां 48,06,936 रुपये
डिलारी बहादुरपुर खद्दर 3474819 रुपये
कुंदरकी मोहम्मदपुर बस्तौर 3387681 रुपये
बिलारी रुस्तम नगर सहसपुर 33,24404 रुपये
छजलैट महोरा 2878816 रुपये
छजलैट भीखमपुर असदलपुर 2749579 रुपये
डिलारी डिलारी चंगेरी 2673248 रुपये
बिलारी नामेनी गड्डी 2603435 रुपये
मुरादाबाद बरवारा मर्जा 2572059 रुपये