सुरजननगर। कोतवाली क्षेत्रके ग्राम मीरपुर मोहन चक में खेजड़ी धाम पर चल रही श्री जम्भवाणी हरि कथा के के चौथे दिन हरिद्वार से आए स्वामी विश्वात्मानन्द जी ने कहा बिश्नोई परिवार में जन्म लेने से बिश्नोई नहीं बनता। गुरु जंभेश्वर भगवान जी द्वारा बनाए गए 29 नियमों का पालन करने वाला व्यक्ति ही बिश्नोई कहलाता है। समस्त बिश्नोई समाज को 29 नियमों का पालन करना चाहिए।
स्वामी जी ने कहां पर्यावरण की रक्षा के लिए हरे वृक्षों की रक्षा करनी चाहिए। बिश्नोई समाज ने हरे वृक्षों की रक्षा के लिए अपने प्राणों का न्योछावर कर दिया लेकिन हरे वृक्षों को नहीं काटने दिया। स्वामी जी ने बताया हमें नशीली पदार्थों का सेवन नहीं करना चाहिए। नशीली पदार्थ का सेवन करने से बुद्धि नष्ट हो जाती है हमारे सोचने की शक्ति समाप्त हो जाती है नशा करने से तन और धन दोनों नष्ट हो जाते हैं। यदि आपको नशा करना है तो भगवान की भक्ति का नशा करो, भगवान की भक्ति का नशा एक बार हो जाए तो जीवन भर उतरता नहीं और मानव भवसागर से पर हो जाता है। बिश्नोई आश्रम हरिद्वार से आये परम पूजनीय महंत प्रणवानंद जी ने बताया जो व्यक्ति अपने माता-पिता की सेवा नहीं करता, जुआ खेलता है, नशा करता है, जीव हत्या करता है, मांसाहारी होता है वह र राक्षस के समान होता है। गुरु जंभेश्वर भगवान जी की आरती के बाद प्रसाद वितरण कर कथा का समापन किया गया। कथा में अमृता नंद जी, अशोक आनंद जी, जगदेवानंद जी, नरेशानंद जी, योगानंद जी आदि संत उपस्थिति रहे।