मुरादाबाद। कोरोना की वजह से मुरादाबाद के विभिन्न न्यायालयों में मुकदमों का बोझ निरंतर बढ़ता जा रहा है। मुकदमों का निस्तारण न होने की वजह से यह आंकड़ा एक लाख 29 हजार पहुंच चुका है। मुकदमों में सुनवाई और बहस नहीं हो पा रही है। न ही विवेचक साक्ष्य जमा कर पा रह हैं। हालात ये हैं कि मुकदमों में सिफ तारीख पर तारीख मिल रही है।
पिछले साल मार्च के अंत में कोरोना केस बढ़ने पर लॉकडाउन लगा दिया गया था। जिस कारण अदालतें और कचहरी बंद कर दी गई थीं। कानूनी प्रक्रिया पर दिसंबर तक असर पड़ा था। अभी सही से उभर भी नहीं पाए थे कि इस वर्ष कोरोना महामारी ने अपना विकराल रूप दिखा दिया। जिसके चलते न मात्र लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हुई, बल्कि अदालतों में भी न्यायिक कार्य प्रभावित हो गया। जिसके कारण न तो मुकदमों की पूरी तरह से सुनवाई हो पाई न ही निस्तारण ही हो पाया। जिसमें सुनवाई और बहस पूरी हो चुकी है, उनका फैसला अटक गया है।
मुरादाबाद जनपद न्यायालयों में इस समय एक लाख 29 हजार मुकदमें लंबित हैं। विधि विशेषज्ञों की मानें तो लोक अदालत न लगने की वजह से मुकदमों का बोझ अदालतों पर पड़ा है। यदि समय से लोक अदालतें लगती तो शायद इतने मुकदमे लंबित न होते। दीवानी मामलों के जानकार एडवोकेट गौरव भटनागर का कहना है कि दीवानी के मुकदमें यूं तो लंबे चलते हैं, लेकिन कई ऐसे भी मामले हैं। जिनमें या तो सुनवाई पूरी हो चुकी है या फिर दोनों पक्षों के बीच में फैसला हो गया है, लेकिन दोनों ही स्थिति में अदालत का फैसला आना शेष है।
तारीख तक सिमट गई सुनवाई
मुरादाबाद। मुकदमों की सुनवाई मात्र तारीखों तक ही सिमट कर रह गई है। वादी-प्रतिवादी दोनों को ही मुकदमे में सिर्फ तारीखें ही हासिल हो रही हैं। कोरोना संक्रमण के कारण हाईकोर्ट ने यह आदेश पारित किया था कि जनपद न्यायालय अति आवश्यक मुकदमों को सुनें। जिससे कोरोना संक्रमण पर रोक लग सके, लेकिन शुरुआती दौर में ही कई अधिवक्ता न्यायालय के कर्मचारियों समेत न्यायिक अधिकारियों को कोरोना ने अपनी चपटे में ले लिया। जिसके चलते मुकदमों में 31 मई तक सामान्य तिथि लगा दी गई।
जिला शासकीय अधिवक्ता नितिन गुप्ता ने बताया कि जिन मुकदमों को शीघ्रता से निपटाया जा सकता था। वह भी इस कोरोना महामारी के कारण नहीं हो पा रहे हैं। जिससे वादकारियों व प्रतिवादी को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन आरोपियों की भी रिहाई नहीं हो पा रही है, जिनको जमानत मिल सकती थी। कचहरी में फैले संक्रमण से सभी डरे हुए हैं।
जिला शासकीय अधिवक्ता अजय कुमार गुप्ता का कहना है कि माह अप्रैल तक दीवानी के 15 हजार से अधिक मुकदमें विचाराधीन थे। जिनमें कुछ ऐसे मुकदमें भी थे। जिनमें समझौते के आधार पर निर्णय हो सकता था। कई मुकदमें लोक अदालत के माध्यम से समाप्त हो सकते थे, लेकिन कोरोना महामारी के कारण न तो लोक अदालत लग सकी और न ही अदालतों में कार्य हो सका। कोरोना महामारी के बाद जब अदालतें खुलें तो किसी भी मामले में लंबी तारीख न देकर कम से कम दिनों की तारीख लगनी चाहिए। जिससे मुकदमों का निस्तारण जल्दी हो सके ।
31 अधिवक्ता, एडीजे और न्यायिक कर्मचारियों की हो चुकी है मौत
मुरादाबाद। कोरोना महामारी के चलते अपर सत्र न्यायाधीश तृतीय सत्यप्रकाश द्विवेदी और इन्हीं की अदालत के सहायक जिला शासकीय अधिवक्ता अनिल कुमार चौहान की मौत हो चुकी है। इनके अलावा न्यायिक कर्मचारी और 31 अधिवक्ताओं की कोरोना से जान जा चुकी है।
बहुचर्चित मामले भी लटके अधर में
मुरादाबाद जिले के बहुचर्चित मुकदमों भी कोरोना महामारी की भेंट चढ़ गए। दो माह पहले ही एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट में चर्चित मुकदमों ने काफी तेजी पकड़ ली थी। ऐसा लगता था कि आने वाले चंद महीनों में ही मुकदमों में निर्णय आना शुरू हो जाएगा, लेकिन अचानक कोरोना महामारी ने इस पर भी ब्रेक लगा दिया। इन मुकदमों में सपा सांसद आजम खां, अब्दुल्ला आजम, नगर विधायक रितेश गुप्ता, कैबिनेट मंत्री भूपेंद्र सिंह, पूर्व सांसद ठाकुर सर्वेश सिंह, विधायक नवाब जान से जुड़े मुकदमें भी शामिल हैं। इनमे कई ऐसे मामले हैं जिनमें गवाही चल रही थी तो किसी में आदेश होना था, लेकिन अब इन मुकदमों को भी इंतजार करना पड़ेगा।
मुरादाबाद में कुल अदालतें 44
सिविल मुकदमें - 15858
आपराधिक मुकदमें - 107612
परिवार न्यायालय से जुड़े - 4284
वाणिज्यिक विवाद - 1245