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Moradabad News: साल में एक करोड़ खर्च, सिर्फ 48 दिन बैठे डॉक्टर

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शिवम वर्मा
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मुरादाबाद। शहर में स्वास्थ्य विभाग के 40 हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर बने हैं। विभाग की शैली में इन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर कहा जा रहा है। प्रत्येक सेंटर का किराया प्रतिमाह 20 हजार रुपये से 30 हजार रुपये तक है। इस तरह हर माह लगभग नौ लाख व साल में एक करोड़ रुपये से ज्यादा का खर्च सिर्फ किराये पर हो रहा है।
इन सेंटरों में लाखों रुपये का सामान एसी, फ्रिज, कूलर दवाएं, बेड आदि रखे हैं। फिर भी महीने में सिर्फ चार दिन और साल में 48 दिन ही डॉक्टर यहां बैठे हैं। शनिवार को आयुष्मान मेले के दौरान ही डॉक्टर व स्टाफ दिखाई देते हैं। बाकी दिनों में सेंटर का जिम्मा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों के हाथों में रहता है। यही कर्मचारी बुखार, खांसी व अन्य सामान्य बीमारियों के मरीजों को दवा देते हैं। सोमवार को अमर उजाला ने शहर के हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों की पड़ताल की। लाइनपार, हनुमान नगर, लक्ष्मणपुरी, जयंतीपुर, करबला आदि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटरों पर डॉक्टर या स्टाफ नहीं थे। यहां चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी बैठे थे। जोकि मरीजों को दवा दे रहे थे। यह स्थिति इसलिए हैं क्योंकि हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर स्थापित किए हुए लगभग एक साल बीतने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी डॉक्टरों की तैनाती नहीं कर पाए हैं।
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लक्ष्मणपुरी सेंटर - दोपहर 12:40 बजे
हेल्थ एंड वेलनेस सेंटर पर एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी मौजूद थे। सेंटर में बेड, एसी, टीवी, कूलर आदि की व्यवस्थाएं थीं। बुखार, खांसी की दवाओं से लेकर ऑक्सीजन सिलिंडर भी उपलब्ध था, लेकिन डॉक्टर न होने से मरीज निराश लौट गए थे। कर्मचारी ने बताया कि शनिवार को डॉक्टर मिलेंगे।

कुंदनपुर सेंटर - दोपहर 1:00 बजे
यहां तैनात डॉक्टर निशा सेंटर पर मौजूद नहीं थीं। चतुर्थ श्रेणी महिला कर्मचारी ने बताया कि डॉक्टर कहीं गई हैं। सेंटर में दवाएं व अन्य संसाधन उपलब्ध थे। आसपास के लोगों ने बताया कि शनिवार को स्वास्थ्य मेला लगता है, तब ही सारा स्टाफ यहां आता है।

हनुमान नगर सेंटर - दोपहर 1:10 बजे
इस सेंटर पर पर भी कोई डॉक्टर या स्टाफ मौजूद नहीं थे। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तुषार ने बताया कि शनिवार के दिन डॉक्टर व स्टाफ मिल जाएंगे। यदि किसी दवा चाहिए तो मैं ही दे देता हूं। अस्पताल में दवाएं व ऑक्सीजन सिलिंडर भी उपलब्ध थे, लेकिन यह सारा सामान नियमित डॉक्टर न होने के कारण एक कमरे में बंद पड़ा था।

जयंतीपुर सेंटर - दोपहर 1:27 बजे
इस सेंटर की स्थिति भी अन्य स्थानों की तरह थी। डॉक्टर व स्टाफ के स्थान पर सिर्फ चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी राजू सैनी ही मौजूद मिले। सेंटर पर बुखार पीड़ित वृद्धा को उन्होंने पैरासिटामोल की टैबलेट दी और कहा कि ज्यादा परेशानी है तो डॉक्टर ही दवा देंगे। उन्होंने शनिवार को आने के लिए कह दिया।
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इसी माह फिर से डॉक्टरों का इंटरव्यू होना है। जो सेंटर खाली हैं, उन पर तैनाती की जाएगी। किराया शासन की नीति के अनुसार है। लिस्ट देखकर ही बताया जा सकेगा कि कितना धन कहां खर्च हुआ है।
- डॉ. संजीव बेलवाल, डिप्टी सीएमओ
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