संभल। अपात्रों को आवास और शौचालय योजना का लाभ देने में खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान, लेखाकार और ग्राम पंचायत अधिकारी फंस गए हैं। जांच में चारों को दोषी मानते हुए जिलाधिकारी ने इन्हीं से अपात्रों को अवमुक्त की गई धनराशि की रिकवरी कराने के आदेश दिए हैं। यह धनराशि 15 दिनों के भीतर देनी होगी।
बनियाखेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत सराय सिकंदर के ग्राम प्रधान के खिलाफ उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री गुलाब देवी के पत्र के साथ अपात्रों को आवास और शौचालयों का लाभ देने की शिकायत की गई थी। मुख्य विकास अधिकारी ने पांच अगस्त-2020 को इस मामले में जिला पंचायत राज अधिकारी और तकनीकी जांच के लिए सहायक अभियंता डीआरडीए संभल को जांच अधिकारी बनाकर कमेटी बनाई। जांच टीम ने जांच में अपात्रों को ही दोनों योजनाओं का लाभ देने की बात सामने आई। इसके लिए खंड विकास अधिकारी, ग्राम प्रधान, लेखाकार और पंचायत सचिव को दोषी मानते हुए अपनी आख्या नौ अगस्त-2020 को अपनी आख्या उपलब्ध करा दी। जांच आख्या के पुन: परीक्षण के लिए सीडीओ ने परियोजना निदेशक, जिला ग्राम्य विकास अभिकरण को नामित किया गया। उन्होंने जांच आख्या को सही मानते हुए अपनी रिपोर्ट दी। जिस पर डीएम ने आवासों के गलत चयन में रिकवरी के आदेश दिए हैं। उस समय ब्लॉक में तैनात रहे दो खंड विकास अधिकारियों से साठ-साठ हजार रुपये, जबकि लेखाकार, संबंधित सचिव और प्रधान से 1.20-1.20 लाख रुपये की रिकवरी के आदेश दिए हैं। कुल 4.80 लाख रुपये की रिकवरी की जानी है। डीपीआरओ जाहिद हुसैन ने बताया कि रिकवरी के लिए 15 दिनों का समय दिया गया है।
8.50 लाख रुपये की वसूली के आदेश
संभल। ग्राम पंचायत बनियाखेड़ा में विकास कार्यों के लिए जो धनराशि खर्च की गई, उसमें खूब वित्तीय अनियमितताएं बरतीं गईं। अपर जिलाधिकारी की ओर से कराई गई प्रारंभिक जांच में इसकी पुष्टि हो सकी है। वित्तीय अनियमितताएं बरतने और शासकीय धनराशि का दुरुपयोग में तत्कालीन ग्राम प्रधान, सचिव और तकनीकी सहायक को दोषी मानते हुए इन्हीं से धनराशि की वसूली करने के आदेश डीएम ने दिए हैं।
बनियाखेड़ा ब्लॉक की ग्राम पंचायत बनियाखेड़ा में तत्कालीन ग्राम प्रधान कमलेश कुमारी के खिलाफ जिलाधिकारी से वर्ष-2019 में शिकायत की गई थी। आरोप था कि गांव में विकास कार्यों में अनियमितताएं बरतीं गईं और फर्जीवाड़ा किया गया है। कुल 23 आरोप लगाए गए थे। सभी की जिला पंचायत राज अधिकारी ने स्थलीय जांच की। जांच में आठ आरोप ऐसे निकले, जो सही थे और वाकई में इन मामलों में फर्जीवाड़ा किया गया। संबंधित ग्राम पंचायत अधिकारियों, ग्राम प्रधान के साथ तकनीकी सहायक को इसका दोषी माना गया। जिलाधिकारी संजीव रंजन ने आरोपी ग्राम प्रधान से 4.06 लाख रुपये, एक सचिव 1.28 लाख रुपये और दूसरे सचिव 2.78 लाख रुपये तथा तकनीकी सहायक से 38476 रुपये की वसूली करने के आदेश दिए हैं।