मुरादाबाद। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के कर्मचारियों ने दो महीने से वेतन न मिलने के विरोध में बृहस्पतिवार को कार्य बहिष्कार कर दिया। कर्मचारियों ने नो पे-नो वर्क की नीति अपनाते हुए काम नहीं किया। प्रदेश सरकार के खिलाफ नाराजगी जताई। हड़ताल के कारण कई स्वास्थ्य सेवाओं पर असर पड़ा और स्वास्थ्य केंद्रों पर ताले लटके रहे। इससे मरीजों को परेशानी का सामना करना पड़ा।
एनएचएम कर्मचारी संगठन के पदाधिकारियों का कहना है कि जिले में एनएचएम के तहत चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ, लैब टेक्नीशियन, डाटा ऑपरेटर और अन्य संविदा कर्मचारी कार्यरत हैं, लेकिन पिछले दो महीने से किसी को वेतन नहीं मिला है। कर्मचारियों का कहना है कि लगातार वेतन न मिलने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की स्कूल फीस, किताबें और घर के खर्च पूरे करने में दिक्कतें आ रही हैं।
कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि कई बार अधिकारियों को ज्ञापन देकर वेतन जारी करने की मांग की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं हुआ। इससे कर्मचारियों में रोष बढ़ता जा रहा है। संगठन के पदाधिकारियों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि यदि 20 मई तक लंबित मानदेय जारी नहीं हुआ तो कार्य बहिष्कार किया जाएगा। मांग पूरी न होने पर अब कर्मचारियों ने हड़ताल शुरू कर दी है।
कर्मचारियों ने समान कार्य के लिए समान वेतन, संविदा कर्मियों को डीए और ईपीएफ का लाभ, रिक्त पदों पर स्थानांतरण, कोविड कर्मियों का समायोजन और संविदा कर्मचारी की मृत्यु पर परिवार के सदस्य को अनुकंपा नियुक्ति देने की मांग भी उठाई है। संगठन के जिला अध्यक्ष अजीजुर्रहीम का कहना है कि जब तक लंबित वेतन जारी नहीं किया जाता और मांगों पर कार्रवाई नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। सीएमओ डॉ. कुलदीप सिंह का कहना है कि कर्मचारियों की मांगों और वेतन भुगतान के मुद्दे को शासन स्तर पर भेजा गया है। बहुत जल्द समाधान हो जाएगा।
स्वास्थ्यकर्मियों के कोट्स (फोटो)
दो महीने से वेतन नहीं मिलने से घर चलाना मुश्किल हो गया है। बच्चों की फीस, किराया और रोजमर्रा के खर्च पूरे नहीं हो पा रहे। कई बार अधिकारियों से मांग की, लेकिन सुनवाई नहीं हुई, इसलिए मजबूर होकर हड़ताल करनी पड़ी।
- अजीजुर्रहीम, स्वास्थ्य कर्मी
एनएचएम कर्मचारी कोरोना काल से लगातार सेवाएं दे रहे हैं, लेकिन आज अपने ही अधिकारों के लिए सड़क पर उतरना पड़ रहा है। समय पर वेतन नहीं मिलने से कर्मचारियों में भारी नाराजगी और मानसिक तनाव है।
- फुरकान, स्वास्थ्य कर्मी
सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात करती है, लेकिन जमीनी स्तर पर कर्मचारियों को समय से मानदेय तक नहीं मिल रहा। परिवार की जिम्मेदारियां निभाना अब कठिन होता जा रहा है।
- लखपत, स्वास्थ्य कर्मी
स्कूलों में नया सत्र शुरू हो चुका है, लेकिन वेतन न मिलने से बच्चों की किताबें और फीस तक जमा नहीं कर पा रहे। आर्थिक संकट के कारण कई कर्मचारियों को उधार लेने की नौबत आ गई है।
- संजीव ठाकुर, स्वास्थ्य कर्मी
एनएचएम के संविदा कर्मचारी वर्षों से कम मानदेय में काम कर रहे हैं। इसके बाद भी दो-दो महीने वेतन रोक देना कर्मचारियों के साथ अन्याय है। मांगें पूरी नहीं हुईं तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।
- जुगल किशोर, स्वास्थ्य कर्मी
हम मरीजों की सेवा के लिए हमेशा तैयार रहते हैं, लेकिन कर्मचारियों की समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा। वेतन और सुविधाओं को लेकर लगातार अनदेखी से कर्मचारियों का मनोबल टूट रहा है।
- रवि गौतम, स्वास्थ्य कर्मी
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स्वास्थ्य केंद्रों का यह रहा हाल
(फोटो)
शहर से लेकर देहात तक प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एनएचम के संविदा कर्मियों के भरोसे चल रहे हैं। सभी कर्मियों के कार्य बहिष्कार में शामिल होने के कारण इन केंद्रों पर बृहस्पतिवार को ताले लगे नजर आए। दोपहर दो बजे कानून गोयान पीएचसी पर अपने पोते का टीकाकरण कराने आए मो. मकसूद को कोई स्वास्थ्य कर्मी नहीं मिला। उन्हें वापस जाना पड़ा। इसी तरह सीएमओ कार्यालय में आयुष्मान कार्ड से संबंधित जानकारी लेने आए सुमित कुमार की मदद नहीं की जा सकी। आयुष्मान डेस्क खाली पड़ी नजर आई। बंगला गांव पीएचसी पर भी ताला लटका मिला। मझोला और नवाबपुरा पीएचसी पर भी चिकित्साधिकारी, फार्मासिस्ट, वार्ड बॉय, स्टाफ नर्स नहीं मिले।