बच्चों के बेहतर स्वास्थ्य के लिए शुरू की गई मिड डे मील योजना तक को घपलेबाजों ने नहीं बख्शा। बच्चों की दाल, सब्जी-रोटी तक एनजीओ वाले खा रहे हैं। पिछले दो सालों से बच्चों ने दाल-रोटी-सब्जी की शक्ल तक नहीं देखी। खाने के नाम पर उन्हें सिर्फ दलिया खिलाया जा रहा है।
शहर के 82 में से 50 से ज्यादा स्कूलों का यही हाल है। ऐसा नहीं है कि इस घपले के बारे में किसी को पता नहीं। शिक्षक, शिक्षक संघ और तमाम सामाजिक संगठनों ने शिकायतें कीं, लेकिन एनजीओ के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई। होती भी कैसे अफसरों और सरकारी नुमाइंदों का काम जो बोलता है।
मेन्यू के अनुसार स्कूलों में सोमवार को रोटी-सोयाबीन/दाल की बड़ी युक्त सब्जी और गुरुवार को रोटी-दाल दिया जाना है। लेकिन नगर क्षेत्र में मिड डे मिल वितरण करने वाले सात एनजीओ में से 6 एनजीओ मेन्यू के अनुसार खाना न देकर बच्चों की रोटी का पैसा हजम कर रहे हैं और उन्हें सिर्फ नमक वाला दलिया दिया जाता है।
अमर उजाला की टीम ने लगातार तीन सप्ताह तक स्कूलों में मिड डे मिल के मेन्यू की पड़ताल की तो पता चला की बच्चों को दो सालों से रोट, सब्जी और दाल नहीं दी जा रही है।
इसके बदले बच्चों को दलिया दिया जा रहा है।
पिछले तीन सोमवार और गुरुवार को प्राथमिक विद्यालय पीटीसी, जूनियर हाई स्कूल पीटीसी, प्रावि आादर्श नगर, मकबरा, मझोला बालक, मझोला बालिका, जूहा मझोला, जूहा कुुंदनपुर, प्रावि सिकंदरपुर, शाहपुर तिगरी, खुशहालपुर, भटावली, पटेल नगर समेत 50 से अधिक स्कूलों में रोटी, सब्जी, दाल का वितरण नहीं हो रहा है। कई बार मामले की शिकायतें भी हुईं, लेकिन आज तक एनजीओ पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।