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मुरादाबाद की जमीं से चाचा नेहरू ने दी आजादी के आंदोलन को धार

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जवाहर लाल नेहरू
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देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू का पीतल नगरी मुरादाबाद से गहरा नाता रहा। आजादी से पहले और बाद में नेहरू जी अपने पिता मोती लाल नेहरू और बेटी इंदिरा गांधी कई बार मुरादाबाद आए।

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मुरादाबाद के कई लोगों से उनकी बेहद नजदीकियां भी रही। आजादी के बाद पहले विधानसभा चुनाव में चाचा नेहरू कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में आए। ताहरपुर में उनको सुनने लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी थी। नेहरू जी को बैलगाड़ी में खड़े होकर संबोधन करना पड़ा था।

वरिष्ठ कांग्रेसी नेता लक्ष्मण प्रसाद खन्ना बताते हैं, जवाहर लाल नेहरू 1920 में पहली बार मुरादाबाद आए। मुरादाबाद में कांग्रेस का संयुक्त प्रांतीय तीन दिवसीय अधिवेशन था। चाचा नेहरू अपने पिता मोती लाल नेहरू के साथ आए और अधिवेशन का हिस्सा बने।
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करीब डेढ़ दशक बाद 1942 में जवाहर लाल दूसरी बार मुरादाबाद के ठाकुरद्वारा आए। सनातन धर्म इंटरकालेज में उन्होंने जनसभा को संबोधित किया। 1942 में आजादी का आंदोलन चरम पर पहुंचने लगा। 1942 में बुध बाजार में महाराजा थीएटर में सम्मेलन हुआ।

इसमें महात्मा गांधी के असहयोग आंदोलन के प्रस्ताव को अंतिम रूप दिया गया। इस सम्मेलन में जवाहर लाल नेहरू शामिल हुए और आंदोलन को धार दी।

अधिवेशन के बाद चाचा नेहरू की मुरादाबाद के कई कांग्रेसियों से बेहद नजदीकियां रही। 1946 में जवाहर लाल नेहरू बेटी इंदिरा गांधी के साथ मुरादाबाद आए और बाजीगरान में साहू राधेश्याम की कोठी में ठहरे।

आजादी के बाद 1952 में पहले विधानसभा चुनाव में चाचा नेहरू को मुरादाबाद आना पड़ा। उस वक्त कांग्रेस में टिकट को लेकर बगावत हो गई थी। नेहरू जी को मुरादाबाद आकर स्थिति संभालनी पड़ी थी।

नेहरू जी ने कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशी बैरिस्टर केदारनाथ के समर्थन में जनसभाएं की। नेहरू जी को सुनने के लिए लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी। टाउन हॉल में उन्होंने भीड़ को संबोधित किया।

नेहरू जी को सुनने के लिए लोग घरों से दौड़े आते थे। नेहरू जी केदारनाथ के प्रचार में कार से कहीं जा रहे थे। ताहरपुर में लोगों की भीड़ इतनी अधिक एकजुट हो गई उन्हें बैलगाड़ी पर चढ़कर संबोधित करना पड़ा था। 1952 के बाद चाचा नेहरू का मुरादाबाद आना नहीं हो सका।
मुरादाबाद में जवाहर लाल नेहरू
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- 1920 में पिता मोतीलाल बोहरा के साथ कांग्रेस के प्रांतीय तीन दिवसीय सम्मेलन में आए
- 1942 में ठाकुरद्वारा में जनसभा संबोधित की
- 1942 में सनातन धर्म इंटर कालेज के प्रबंधक साहू सीताराम और शिव सुंदरी मांटेसरी कालेज के संस्थापक साहू रमेश के आमंत्रण पर दोबारा ठाकुरद्वारा आए
- 1946 में बेटी इंदिरा गांधी के साथ आए और बाजीगरान स्थित साहू राधेश्याम की कोठी में एक रात ठहरे
- 1952 में पहले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस में बगावत होने पर पंडित नेहरू मुरादाबाद आए और टाउन हॉल में जनसभा की
- 1952 में कांग्रेस प्रत्याशी के समर्थन में पंडित नेहरू चुनाव प्रचार में आए। ताहरपुर में कार से उतरकर बैलगाड़ी पर खड़े होकर जनसभा संबोधित की
बैरिस्टर केदारनाथ कांग्रेस के प्रत्याशी थे।
नत्थू नारायण श्रोत्रिय थे। टिकट नहीं मिला तो निर्दलीय लड़े थे। इंजन निशान नहीं थे।

युवा केंद्र में अब सूखते हैं धोबी की कपड़े
मुरादाबाद का नेहरू युवा केंद्र दुर्दशा का शिकार है। युवा केंद्र में अब धोबी के कपड़े सूखते हैं। रखरखाव के अभाव में केंद्र खस्ताहाल हो चुका है। सालों से रंग रोगन तक नहीं हुआ है। 1987 में भारत सरकार के अंतर्गत युवा मामलों और खेल मंत्रालय के तहत देशभर में नेहरू युवा केंद्र संगठन बने। उत्तर प्रदेश में पूर्व मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने युवा केंद्रों की स्थापना की। केंद्रों में 15 से 25 साल के आयु वर्ग के छात्रों, गैर छात्रों के रचनात्मक कार्यों, प्रतियोगी खेलों के विकास, शारीरिक शिक्षा, समुदाय सेवा के लिए प्रेरित किया जाता रहा। मुरादाबाद नेहरू युवा केंद्र का अतीत भी एतिहासिक रहा है। युवाओं को प्रेरित करने में केंद्र का अहम योगदान रहा। लेकिन पिछले कई सालों से केंद्र दुर्दशा का शिकार है। केंद्र में दो कमरे और एक हॉल बना है। काफी बड़ा मैदान है। मैदान में अक्सर धोबी के कपड़े सूखते हैं।

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