मुरादाबाद। कांवड़ यात्रा के दौरान घायल कांवड़िये की मौत के मामले में बरती गई लापरवाही और संवेदनहीनता पाकबड़ा पुलिस को भारी पड़ गई। पुलिस ने कांविड़ये की शिनाख्त कराए बिना शव का अंतिम संस्कार करा दिया। कपड़ों से बेटे की पहचान करने वाली मां को पोस्टमार्टम रिपोर्ट नहीं दी गई। इस मामले में एसएसपी ने पाकबड़ा थाना प्रभारी विनोद कुमार समेत छह पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर कर दिया है।
मझोला के एकता कॉलोनी आजाद नगर निवासी सर्वेश देवी ने बताया कि उसका बेटा अजीत 27 जुलाई की रात करीब साढ़े आठ बजे मोहल्ले में रहने वाले दीपक, किशन, सुनील के साथ ब्रजघाट से कांवड़ लेने के लिए गया था। अमरोहा जिले में डिडौली थानाक्षेत्र में दिल्ली-लखनऊ हाईवे पर घायल अवस्था में मिले अजीत को पुलिस और राहगीरों ने टीएमयू अस्पताल में भर्ती करा दिया जबकि उसके तीनों साथी गायब हो गए थे। जहां 29 जुलाई को अजीत की मौत हो गई थी। इसकी जानकारी मिलने पर पाकबड़ा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और लावारिस में उसका पोस्टमार्टम करा दिया। मृतक की पहचान कराने की कोई कोशिश नहीं की गई।
29 जुलाई को सर्वेश देवी ने मझोला थाने में बेटे की गुमशुदगी दर्ज कराई। 72 घंटे बाद अजीत के शव का लावारिस में ही अंतिम संस्कार करा दिया गया। एक अगस्त की शाम बेटे के बारे में जानकारी मिली तो महिला अपने परिवार के लोगों के साथ पाकबड़ा थाने पहुंच गई। तब पता चला कि बेटे का अंतिम संस्कार करा दिया गया है। महिला का दावा है कि पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट देने से पहले उसके सामने शर्त रख दी कि अगर रिपोर्ट चाहिए तो कोई कार्रवाई नहीं करनी होगी। थाने में कोई सुनवाई नहीं होने पर पीड़िता ने बृहस्पतिवार को एसएसपी से शिकायत की जिसपर उन्होंने सीओ से मामले की जांच कराई। जांच में पाकबड़ा पुलिस की लापरवाही सामने आई। एसएसपी ने शुक्रवार को थाना प्रभारी विनोद कुमार, एसएसआई सुरेंद्र सिंह, पाकबड़ा कस्बा चौकी इंचार्ज इजहार अली, दरोगा विशाल चौधरी, हेड मोहर्रिर अमित कुमार और महिला कांस्टेबल प्रिया को लाइन हाजिर कर दिया।
एसएसपी सतपाल अंतिल ने बताया कि ड्यूटी में लापरवाही और संवेदनहीनता किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी। शिनाख्त से लेकर अंतिम संस्कार तक पुलिस की जिम्मेदारी तय है। ऐसे में इस तरह की लापरवाही बेहद गंभीर है।