मुरादाबाद। शहर के जिन निजी स्कूलों पर प्रशासन और शिक्षा विभाग ने सख्ती की, वहां एनसीईआरटी की किताबें जगह बना सकीं। इन स्कूलों के बच्चों की पीठ पर बस्ते का वजन घटा तो अभिभावकों की जेब पर बोझ कम हुआ। यह राहत उन स्कूलों के अभिभावकों तक ही सीमित है, जहां अधिकारियों ने सख्ती की थी। अन्य अधिकांश स्कूल निजी प्रकाशकों के जाल में फंसाकर अभिभावकों की जेब हल्की करने पर आमादा हैं।
कुछ स्कूलों ने एनसीईआरटी की चंद किताबों के साथ बाकी निजी प्रकाशकों की लगाने का नया रास्ता खोज लिया है। इनसे जुड़े अभिभावक भी परेशान हैं। बच्चे के उत्पीड़न के डर से ज्यादातर अभिभावक अफसरों से शिकायत की हिम्मत तक नहीं जुटा पा रहे।
मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के उप सचिव राजदीप गोयल ने बताया कि सेंट मेरी स्कूल में कक्षा छह में 16 किताबें लगाई गई हैं। इसमें एक भी एनसीईआरटी की नहीं है, सभी निजी प्रकाशकों की हैं। शिरडी साईं स्कूल में कक्षा आठ में 14 निजी प्रकाशकों की किताबें हैं।
इसी तरह आर्यंस इंटरनेशनल स्कूल में कक्षा छह में केवल गणित, विज्ञान, सामाजिक विज्ञान की ही किताब एनसीईआरटी की है, बाकी निजी प्रकाशकों की। वहीं, रानी प्रीतम कुंवर स्कूल में कक्षा पांच में 14 किताबों में से केवल दो किताबें एनसीईआरटी की हैं। वहीं, बोनी एनी पब्लिक स्कूल ने कक्षा चार, सेंट मीरा एकेडमी ने कक्षा सात व कक्षा तीन और आरआरके स्कूल ने कक्षा एक से लेकर पांच तक निजी प्रकाशकों की किताबें ही लगाई हैं।
मुरादाबाद पैरेंट्स ऑफ ऑल स्कूल के पदाधिकारियों का कहना है कि इन स्कूलों पर अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। इसलिए इन स्कूलों में एनसीईआरटी के स्थान पर निजी प्रकाशकों की किताबों की मनमानी चल रही है।
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पांच हजार से आठ हजार तक कीमत
निजी प्रकाशकों की किताबों के सेट की कीमतें अलग-अलग हैं। इसकी रेंज पांच हजार रुपये से लेकर आठ हजार रुपये तक है। विभिन्न कक्षाओं में करीब 14 से 20 किताबें लगाई गई हैं। ऐसे में अभिभावकों पर आर्थिक बोझ बढ़ता जा रहा है।
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अभिभावक बोले...
बेटा कक्षा छह में है। साढ़े छह हजार रुपये की किताबें खरीद चुका हूं। अभी बच्चे के स्कूल का बाकी सामान भी खरीदना हैं। अगर एनसीईआरटी की किताबें लगी होतीं तो कम खर्च में काम चल जाता।- सचित अग्रवाल
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एक निजी स्कूल में बेटे का कक्षा तीन में एडमिशन हुआ है। किताबें करीब 3500 रुपये की बैठीं। सभी किताबें निजी प्रकाशकों की हैं। एक भी किताब एनसीईआरटी की नहीं है स्कूल में। - मोहित कुमार
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बेटी का दाखिला कक्षा आठ में कराया है। अभी कुछ किताबों की खरीदारी की है। करीब पांच हजार रुपये खर्च हो चुके हैं। बाकी किताबें खरीदने में दो से ढाई हजार रुपये और लगेंगे। एनसीईआरटी की किताब नहीं होने से खर्च का बोझ बढ़ गया है। - राजीव सिंह
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वर्जन..
-चार निजी स्कूलों पर एनसीईआरटी की किताबें नहीं लगाने की बात जानकारी में आई थी। उन पर नियमानुसार एनसीईआरटी किताबें लगवा दी गई हैं। अभी कई ऐसे स्कूल हैं जो खुले नहीं हैं। खुलते ही इनकी भी जांच करा ली जाएगी। कुछ स्कूलों की जांच चल भी रही है। जो भी निजी स्कूल नियमों का उल्लंघन करते मिलेगा उस पर कार्रवाई की जाएगी।- देवेंद्र कुमार पांडेय, डीआईओएस