मुरादाबाद। सपा सांसद डा. एसटी हसन ने सांसद में बजट पर परिचर्चा के दौरान जौहर विश्वविद्यालय का मुद्दा उठाया। कहा कि राजनीतिक मतभेद और मनभेद में शिक्षा के मंदिर को राजनीति की भेंट चढ़ाना क्या उचित है। विश्वविद्यालय को तबाह करने की कोशिश की जा रही है। 1500 किमी पैदल चलकर अपने घरों को पहुंचने वाले किसानों के लिए बजट में क्या है।
सपा सांसद ने कहा कि लॉडाउन में कारोबार बर्बाद हो गया। नौकरियां चली गई। ऐसे में बजट में इनकम टैक्स की लिमिट बढ़ाई जानी चाहिए थी लेकिन अफसोस की बात है कि लिमिट नहीं बढ़ाई गई। उन गरीबों के लिए बजट में क्या है, जो लॉकडाउन में 1500 किमी पैदल चलकर अपने घरों को पहुंचे। रास्ते में जिन लोगाें की मौतें हो गई, क्या उन्हें आर्थिक सहायता मिली। शिक्षा के बजट में कमी की गई। लद्दाख में सेंट्रल यूनिवर्सिटी कायम कर रहे हैं, अच्छी बात है। सैनिक स्कूल बना रहे हैं। लेकिन आप निजीकरण की ओर भी बढ़ रहे हैं। मेरे मंडल में रामपुर में मायनारिटी की यूनिवर्सिटी बनी। आए दिन इस यूनिवर्सिटी को तबाह करने की कोशिश होती है। कभी गेट तोड़ने की बात होती है तो कभी दीवार पर बुल्डोजर चढ़ जाते हैं।
अब उसकी आधी से अधिक जमीन सरकार वापस सरकार ले रही है। हमारे राजनीतिक मतभेद हो सकती है। थोड़े मनभेद भी हो सकते हैं, लेकिन राजनीतिक मतभेद और मनभेद की वजह से शिक्षा के मंदिर को राजनीति की भेंट चढ़ना क्या उचित है। किसान की आय अभी तक दोगुनी नहीं हो सकी। किसान परेशान है। आज किसान अपनी बात कहने के लिए दिल्ली दरबार जाना चाहता है तो उसके साथ क्या सुलूक हुआ ये आप सब जानते हैं। जिन राज्यों में चुनाव होना हैं, वहां तो बजट में पैसा दे दिया गया, लेकिन उत्तर प्रदेश को नहीं दिया। उन्होंने एमएसपी का भी मुद्दा उठाया। यूपी के अंदर सड़कों बुरा हाल है। सड़कों पर गड्ढे बने हैं। ब्रास का एक्सपोर्ट हिंदुस्तान की पहचान बनाता है। जब से ये सरकार आई है 9000 का एक्सपोर्ट घटकर 5500 रह गया है। लॉकडाउन में कच्चे माल की कीमतें बढ़ गई। कहा कि योजना बंद कर हम कैसे चीन, कंबोडिया, वियतनाम से मुकाबला करेंगे। उन्होंने अपनी बात ‘तुम आसमानों की बुलंदियों से जल्द लौट आना, हमें जमीन की मसाइल पर बात करनी है’ शेर से खत्म की।