खुदा ने ये सिफत दुनिया की सब मांओं को बख्शी है, वो पागल भी हो जाएं तो बच्चे याद रहते हैं। शायर मुनव्वर राना ने शायद यह शेर ऐसी ही मांओं के लिए कहा होगा जिसे मुरादाबाद ने शनिवार को जिला अस्पताल में देखा। वह मंदबुद्धि है। उसे अच्छे बुरे का फर्क मालूम नहीं। न घर है और न ही कोई ठिकाना।
इंतजाम के नाम पर बदन पर कपड़े भर है और सिर छिपाने को रेलवे स्टेशन की छत। फिर भी यह मां कलेजे के टुकड़े को अपने सीने से चिपकाए हुए है। कुछ दिनों पहले ही ट्रेनों में दो मांओं ने अपने जिगर के टुकड़ों को लावारिस छोड़ दिया था, इन घटनाओं ने ममता को शर्मसार किया था।
लेकिन हाल ही में एक ऐसी मां ने पंद्रह अक्तूबर की रात रेलवे स्टेशन पर एक बच्ची को जन्म दिया, जिसकी हरकतों पर लोग हंस देते हैं। जीआरपी ने मंदबुद्घि महिला और बच्ची को महिला अस्पताल में भर्ती करा दिया। तब से ये मंदबुद्धि महिला अस्पताल में हैं। अपने बच्ची को सीने से लगाए रहती। अपने से अलग नहीं होने देती है।
अस्पताल कर्मियों ने बच्ची को अलग करने की कोशिश की तो वह वार्ड से बाहर निकल आई। दिनभर बाहर ही बच्ची को लेकर बैठी रही। हालांकि बच्चे की सेहत से अंजान महिला की ये हरकत उसके लिए ठीक नहीं है। इसके उलट पिछले दिनों दो बच्चियों को अपनों ने ट्रेन में छोड़ दिया था।
एक बच्ची को बाहरी जिले के शिशु गृह को भेज दिया गया है। जबकि दूसरी ने इलाज के दौरान टीएमयू में दम तोड़ दिया। ये मंदबुद्धि महिला उन दो मां के लिए नजीर है, जिन्होंने जन्म देने के साथ ही कलेजे के टुकड़े को अपने से अलग कर दिया।
"महिला मंदबुद्धि है। वह बार-बार वार्ड से बाहर निकल जा रही है। बच्ची को अपने से अलग नहीं होने दे रही है। इससे बच्ची की सेहत खराब हो सकती है। जच्चा-बच्चा को जीआरपी के पास भेजा गया था। लेकिन उसे लौटा दिया गया।"- डा. कल्पना सिंह, सीएमएस, महिला अस्पताल।