पति के निधन के बाद संभालनी पड़ी जिम्मेदारी : बुशरा परवीन
जटपुरा की बुशरा परवीन की शादी वर्ष 2013 में रामनगर के इंदिरा कॉलोनी निवासी कािशफ खान से हुई थी। उन्होंने बताया कि वर्ष 2019 में अचानक पति की मौत से दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। दो बेटियों की जिम्मेदारी मेरे कंधों पर आ गई।
पति की मौत के बाद मुझे घर से निकाल दिया गया। मायके की आर्थिक स्थिति ठीक न होने के कारण मां, भाई और बहन की जिम्मेदारी भी मेरे ही कंधों पर आ गई। दो साल तक केरल और दो साल रामनगर उत्तराखंड में ब्यूटीशियन का काम किया।
2024 में आउटसोर्सिंग के जरिए मुरादाबाद परिक्षेत्र में परिचालक के पद पर तैनाती मिल गई। अब धामपुर-मुरादाबाद रूट पर ड्यूटी कर रही हूं। सुबह ड्यूटी पर निकलती हूं तो रात 10 बजे घर पहुंचती हूं। अब सब कुछ बेटियों के लिए ही करना है। बेटियों को डॉक्टर और वकील बनाना चाहती हूं।
बच्चों का भविष्य बनाना ही मेरा मकसद : रीना रानी
नगीना की रहने वाली रीना रानी की शादी 2007 में हुई थी। करीब 8 साल बाद पति की दुर्घटना में मौत हो गई। बतातीं हैं कि मेरे पति नजीबाबाद डिपो में चालक थे। उनकी मौत के बाद दो बेटियां और एक बेटे की जिम्मेदारी मेरे सिर पर आ गई। पति के मौत के बाद तीन साल तक नौकरी नहीं लग पाई।
इस दौरान मैंने सिलाई का काम किया। मैं बच्चों का सही तरीके से देखभाल करना चाहती थी। बाद में परिचालक की नौकरी लग गई। घर का सारा खर्च नौकरी से ही चलता है। सभी बच्चे सेंट मैरी स्कूल में पढ़ते हैं।
मैं अपने बच्चों को सिविल सर्विसेज में भेजना चाहती हूं। बच्चों के भविष्य के लिए ही परिचालक की नौकरी कर रही हूं। उन्होंने बताया कि वह नगीना-मुरादाबाद रूट ड्यूटी कर रही हैं। रोज 12 घंटे ड्यूटी करनी पड़ती है।
बेटियों का जीवन संवारने में जुटीं पूनम
बैंक कॉलोनी की रहने वाली पूनम मुरादाबाद डिपो में आउटसोर्सिंग के जरिए परिचालक की नौकरी कर रही हैं। कहतीं हैं, मेरी शादी 2012 में हुई थी। पति आरएम ऑफिस मुरादाबाद में बाबू थे। मेरे जीवन में उस समय दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, जब 2020 में पति की मौत हो गई।
पति की मौत के बाद कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि मैं क्या करूं। तीन साल तक किसी तरह से परिवार का खर्च चला। तीन बेटियां हैं, इनकी पढ़ाई-लिखाई को लेकर काफी चिंतित हूं। बेटियों का बेहतर भविष्य बनाने के लिए 2024 से परिचालक की नौकरी कर रही हूं।