बेटे का शव देख बेसुध हुई मां रचना ।
- फोटो : CITY
मुरादाबाद। इकलौते बेटे को खोने वाली मां रचना के शरीर में बीस से ज्यादा छर्रे धंसे हैं। वह 31 घंटे अस्पताल में रही। बावजूद इसके डाक्टरों ने उसके शरीर में धंसे छर्रों को नहीं निकाला। पोस्टमार्टम के बाद बच्चे का शव घर पहुंचा तो मां ने बेटे को अंतिम बार देखने की इच्छा जताई। गुरुवार छह बजे घायल महिला घर पहुंची तो परिजन के साथ हर शख्स की आंख नम हो गईं।
हिमगिरी कालोनी विजय कुमार के बेटे पुनीत और पत्नी रचना को बुधवार दोपहर बारह बजे गोली मार दी गई थी। मां बेटे को घायल अवस्था में निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां डाक्टरों ने पुनीत को मृत घोषित कर दिया था। मां को भी बीस से ज्यादा छर्रे लगे हैं। विजय के भाई का आरोप है कि डाक्टरों ने महिला के शरीर में धंसे छर्रों को अभी तक नहीं निकाला है। गुरुवार दोपहर ढाई बजे पीएम के बाद पुनीत का शव घर पहुंचा। तब रचना ने अपने बेटे को अंतिम बार देखने की इच्छा जताई। परिजन अस्पताल पहुंचे और उन्होंने रचना को घर ले जाने को कहा, डाक्टरों ने उसे डिस्चार्ज करने में तीन घंटे से ज्यादा वक्त लगा दिया। इतना नहीं उनका कहना है कि अस्पताल में छर्रों के ऊपर से ही पट्टी बांध दी गई है। 31 घंटे अस्पताल में भर्ती होने के बावजूद शरीर में धंसे छर्रे नहीं निकाले गए हैं। शरीर में छर्रे धंसे होने और दर्द से कराहते हुए मां गुरुवार शाम घर पहुंची और बेटे के शव को देखकर फफक पड़ी। कॉसमॉस हास्पिटल के डायरेक्टर डा. अनुराग अग्रवाल ने बताया कि छर्रों को निकालने की जरूरत नहीं होती है। रचना पहले से स्वस्थ हैं।