हिमगिरी कॉलोनी में घर पर देसी बम से हमला और फायरिंग
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र की हिमगिरी कॉलोनी में 14 दिसंबर 2023 की रात किशोर और युवकों ने एक घर पर देसी बम से हमला किया था। इस दौरान फायरिंग भी की थी। पुलिस ने इस मामले में दरोगा के बेटे और उसके साथियों को गिरफ्तार किया था।
सोशल मीडिया पर टिप्पणी के विवाद में ली थी किशोर की जान
मझोला के लाइनपार मंडी समिति के पास पांच जून 2021 को युवाओं के दो गुट भिड़ गए थे। इस दौरान देसी बम और फायरिंग की घटना को अंजाम दिया गया था। इस घटना में कोतवाली क्षेत्र में रहने वाले देव कश्यप नाम के किशोर की जान चली गई थी।
घटना के समय देव अपने साथियों के साथ लाइनपार में घूमने गया था। वहां दूसरे गुट के किशोरों ने उसे घेर लिया था। पुलिस की जांच में सामने आया था कि सोशल मीडिया पर एक फोटो पर टिप्पणी करने को लेकर विवाद हुआ था। आरोपी किशोर पर माफी मांगने का दबाव बना रहे थे।
एसएसपी आवास के पास ही भिड़े गए थे दो गुट
शहर में पनप रहे नए गैंग के सदस्यों ने 15 सितंबर 2023 की रात एसएसपी आवास के पास बमबाजी और फायरिंग की थी। इस वारदात में भी नाबालिग शामिल थे। कुछ दिन पहले ही दो पक्षों में हुए विवाद के दौरान एक युवक की वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर वायरल करने में यह वारदात हुई थी। इसमें पुलिसकर्मियों के बच्चे भी शामिल थे।
राजकीय संप्रेक्षण गृह में बंद हैं 115 किशोर
सिविल लाइंस क्षेत्र स्थित राजकीय संप्रेक्षण गृह में 115 किशोर बंद हैं। डीपीओ अनुराग श्याम रस्तोगी ने बताया कि संप्रेक्षण गृह में मुरादाबाद के अलावा अमरोहा, संभल, बिजनौर और रामपुर के किशोर हैं। ये किशोर लूट, हत्या, दुष्कर्म, मारपीट और अन्य आपराधिक घटनाओं में लिप्त पाए गए हैं। किशोरों की लगातार पढ़ाई और काउंसिलिंग भी कराई जाती है।
डॉक्टर बोले, बच्चों से करें नियमित बात
मनोचिकित्सक डॉ. नीरज गुप्ता का कहना है कि नाबालिग और युवाओं का अपराध में शामिल होना समाज के लिए चिंता का विषय है। लोगों को ये समझाना बहुत जरूरी है कि नाबालिग किन कारणों से ऐसा कर रहे हैं। सभी माता-पिता अपने बच्चों की हर गतिविधि पर ध्यान रखें। बच्चों से नियमित बातचीत करनी चाहिए। उन्हें अच्छाई-बुराई के बारे में समझाएं।
नाबालिगों के अपराध में शामिल होने के कई कारण हैं, लेकिन वर्तमान दौर में सोशल मीडिया का दुरुपयोग बड़ा कारण है। इसके लिए युवा गैंगस्टर और अपराधियों को अपना रोल मॉडल मान रहे हैं। अभिभावकों को देखना चाहिए कि उनके बच्चे किससे प्रभावित हो रहे हैं। बच्चों को सफल टीचर, वैज्ञानिक, अफसरों की कहानियां सुनाएं और पढ़ाएं। - सतपाल अंतिल, एसएसपी