कुछ देर बाद परिजनों को पता चला कि सुरक्षा गार्ड का लहूलुहान शव गांव से करीब पांच सौ मीटर जंगल में नहर की पुलिया के पास पड़ा है। सुरक्षा गार्ड की गर्दन में गोली लगी थी। पास में ही बंदूक पड़ी थी। मैनाठेर कोतवाल मनोज कुमार ने बताया कि जांच में पता चला है कि सुरक्षागार्ड को पत्नी नशा करने से रोकती थी, इसी बात को लेकर मनमुटाव रहता था।
इसी बात को लेकर उसने अपनी लाइसेंसी बंदूक से गोली मारकर आत्महत्या की है। सुरक्षागार्ड कुशल पाल व्यवहार के घनी थे। उनके आकस्मिक निधन से हर ग्रामीण सकते में है। परिवार में उनकी पत्नी गुड्डो देवी और दो बेटियां पुष्पा और मंजू है। उनके दोनों बेटियों की शादी हो चुकी है।
बताते है कि ड्यूटी करने के बाद सुरक्षागार्ड अपने लाइसेंसी बंदूक को निर्यात फर्म में ही रख आते थे। वह दो दिन से ड्यूटी पर भी नहीं गए थे। बताते कि कुशल पाल शनिवार सुबह छह बजे निर्यात फर्म से अपने बंदूक लेकर आए थे और बाइक घर में खड़ी करने के बाद में बंदूक ले जंगल को चले गए थे।
लाइसेंसी बंदूक ले जाते लोगों ने था टोका
जिस समय सुरक्षागार्ड कुशल पाल जंगल की ओर से जा रहे थे कुछ परेशान से नजर आ रहे थे। गांव के ही कुछ लोगों ने उनको टोका तो वह बोले थे कि जंगल में उल्लू मारने को जा रहा हूं। इतना सुनकर लोगों ने चुपी साध ली थी। कुछ देर बाद ही खबर फैली कि सुरक्षागार्ड का गोली लगा शव लहूलुहान हालत में नहर की पुलिया के पास पड़ा है।